Bareilly News: देश की बेटियों ने जीता खिताब… शहर की बेटियां भी खेलने को बेताब
बरेली। एशिया कप हॉकी (जूनियर) में देश की बेटियों ने दक्षिण कोरिया को हराकर इतिहास रच दिया है। टीम ने पहली बार यह खिताब जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ऐसे में शहर की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने के सपने देख रहीं हैं, लेकिन छह माह से शहर में कोई हॉकी प्रतियोगिता ही नहीं हुई। खिलाड़ियों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
पिछले तीन साल से खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाया है। इसी क्रम में रविवार को एशिया कप हॉकी (जूनियर) में देश की बेटियों ने चार बार की चैंपियन दक्षिण कोरिया को 2-1 से हराकर ट्रॉफी जीती। स्टेडियम के खिलाड़ियों को इस जीत के साथ शहर में खेलों का स्तर ऊंचा उठने की उम्मीद जगी है।
अभ्यास कर रहीं सब जूनियर वर्ग की खिलाड़ियों ने बताया कि पिछले साल सितंबर में सिक्स ए साइड प्रतियोगिता हुई थी। उसके बाद से अभ्यास ही कर रहे हैं। प्रतियोगिताएं होतीं तो पता चलता कि अभ्यास के क्या लाभ हो रहे हैं।
कोरोना काल से पहले थे काफी खिलाड़ी
कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने बताया कि कोरोना काल से पहले शहर से कई पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी निकले। दो साल का ब्रेक और फिर काफी समय से कोच न होने से भी खेल का स्तर गिरता चला गया।
एक जिला, एक खेल में भी जिले को मिला है हॉकी
प्रदेश सरकार की ओर से संचालित एक जिला-एक खेल योजना के तहत सभी 75 जिलों में एक-एक खेल की जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए कदम उठाए जाने थे। बरेली को इस योजना में हॉकी मिला है, लेकिन उसका भी कोई असर नहीं दिख रहा है।
खेलो इंडिया के तहत कोच दे रहीं प्रशिक्षण
खेलो इंडिया के तहत स्टेडियम में एक साल से हॉकी की प्रशिक्षक की तैनाती है। उन्हें बालक और बालिका वर्ग के कुल 30 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना है। उनके नेतृत्व में अभी 10 सब जूनियर बालिका वर्ग की खिलाड़ी अभ्यास कर रही हैं। इसके अलावा कुछ अन्य सीनियर खिलाड़ी स्टेडियम में कभी-कभी अभ्यास करने आती हैं।
आकलन के लिए प्रतियोगिता जरूरी
सिंतबर में सिक्स ए साइड प्रतियोगिता हुई थी, उसके बाद से नहीं हुई। रोज सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। अपना आकलन करने के लिए पूरी प्रतियोगिता जरूरी है। – शिल्पी प्रजापति
11 महीने से अभ्यास कर रहे हैं। बाकी खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करते हैं, लेकिन अभ्यास करने नहीं आते। टीम पूरी बने तो प्रतियोगिता में हिस्सा लेने में मजा भी आए। – लावन्या यादव
वर्जन
कोरोना काल के बाद से एक वर्ग की पूरी टीम तैयार ही नहीं हो पा रही है। सितंबर की प्रतियोगिता के बाद नेशनल खेलों में ड्यूटी लगी थी और फिर टीम के साथ बाहर प्रतियोगिताओं में जाना पड़ा। इस दौरान मौसम के कारण खेलों का सीजन भी नहीं है। अब वापस आकर प्रतियोगिता आयोजित कराने की तैयारी चल रही है। – (वसीम खान, सचिव, बरेली हॉकी संघ)



