Bareilly News: मच्छरनाशक दवाओं की फॉगिंग में आड़े आ रही डीजल की कमी
बरेली। प्री-मानसून की दस्तक के साथ मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मलेरिया, डेंगू के लिहाज से जिला हाई रिस्क की श्रेणी में है। इस बीच अब तक जिले में फॉगिंग और लार्वानाशक दवाओं का छिड़काव सही ढंग से शुरू नहीं हो सका है। मलेरिया विभाग को हाल ही में शासन से फॉगिंग के लिए 250 लीटर मेलाथियान टेक्निकल नाम की दवा मिली है। डीजल की कमी के कारण पर्याप्त फॉगिंग नहीं हो पा रही।
जिले में जनवरी से अब तक डेंगू के 13 मरीज मिल चुके हैं। मलेरिया के मरीज भी लगातार मिल रहे हैं। एक लीटर मेलाथियान टेक्निकल की फॉगिंग के लिए 19 लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। इसमें बजट की कमी आड़े आ रही है। दूसरी ओर मिट्टी का तेल न मिलने के कारण पायराथ्रेम की फॉगिंग बंद कर दी गई है। पायराथ्रेम की फॉगिंग के मामले में भी दवा और मिट्टी के तेल का अनुपात मेलाथियान टेक्निकल के अनुसार ही रहता है। हालांकि, मलेरिया विभाग का दावा है कि गांवों में लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा रही है। लोगों को मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। मेलाथियान से ज्यादा कारगर है पायराथ्रेम की फॉगिंग मेलाथियान टेक्निकल के मुकाबले पायराथ्रेम की फॉगिंग ज्यादा कारगर है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. डीआर सिंह का कहना है कि पायराथ्रेम की फॉगिंग के लिए मिट्टी के तेल का कोटा निर्धारित करने की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। फिलहाल मेलाथियान टेक्निकल 95 फीसदी की फॉगिंग कराई जा रही है।
नगर निकायों ने अब तक नहीं मांगी दवा
अब तक नगर निकायों ने फॉगिंग पर ध्यान नहीं दिया है। शहर क्षेत्र में दवाओं का छिड़काव मलेरिया विभाग जबकि नगर निकायों में नगर पालिका और नगर पंचायतें कराती हैं। फॉगिंग के लिए दवाएं मलेरिया विभाग देता है। मलेरिया विभाग के पास दवा का पर्याप्त स्टॉक है। नगर निकायों ने अभी मलेरिया विभाग को दवा की डिमांड नहीं भेजी है।



