Bareilly News: बच्चे की खातिर अपनों से भिड़ी, संस्था में रही, और अब सलाखों में पहुंची
बरेली। बच्चे आरुष के प्यार की खातिर पूर्व सिपाही इकबाल सिंह और अनु ने अपना जीवन अपराध के दलदल में फंसा लिया। अनु तो अपनों से भी विरोध मोल ले लिया। घर छोड़कर बच्चा पालने वाली संस्था में रही। …और अब सलाखों के पीछे पहुंच गई। पकड़े जाने पर यही चर्चा होती रही कि आरुष को लेकर दोनों का प्यार सच्चा पर तरीका गैरकानूनी है। बच्चे से दूर होने के गम में दोनों आंसू बहाते रहे।
एएचटीयू प्रभारी हरवीर सिंह और उनकी टीम ने अनु चंद्रा व इकबाल सिंह से कोतवाली में लंबी पूछताछ की। उन्होंने बताया कि आरुष करीब छह साल पहले लावारिस हालत में जिला अस्पताल पहुंचा था। किला थाने के मोहल्ला खन्नू निवासी अनु चंद्रा के भाई और भाभी के पास कोई बच्चा नहीं था। उन्होंने किसी तरह बिना लिखा-पढ़ी के आरुष को हासिल कर लिया। आरुष घर पर कथित माता-पिता के बजाय बुआ अनु से ज्यादा हिल गया। ऐसी नौबत आई कि आरुष को अपने पास रखने के लिए ननद और भाभी में तकरार हो गई। अनु ने पुलिस को तहरीर देकर भाई और भाभी पर बच्चे को अवैध तरीके से रखने का आरोप लगाया। पुलिस ने जांच में आरोप सही पाया। बाल कल्याण समिति ने आरुष को बोर्न बेबी फोल्ड संस्था को सौंप दिया।
बताते हैं कि संस्था में आरुष ने रोते-रोते कोहराम मचा दिया तो अनु ने वहां पहुंचकर उसे शांत किया। तब अनु ने बाल कल्याण समिति को बताया कि बुआ के तौर पर आरुष उससे हिला-मिला है। प्रस्ताव रखा कि वह उसके साथ केयर टेकर के तौर पर रहना चाहती है। समिति की अनुमति के बाद अनु संस्था में ही रहने लगी।
कोई और लेता गोद, इससे पहले किया अगवा
संस्था में रहने के दौरान ही अनु इकबाल सिंह के संपर्क में आ गई थी। आरुष का नाम भी उन बच्चों की सूची में था, जिन्हें निसंतान लोगों को गोद दिया जाना था। उसके जाने का खतरा भांपकर अनु ने इकबाल सिंह से मिलकर उसे ले जाने का प्लान बनाया। आरुष के बीमार होने पर उसे सुभाषनगर के स्टेशन रोड स्थित अस्पताल में दिखाने के बहाने ले गई। अधीक्षक प्रिमरोज को शक था। उन्होंने दो नर्स साथ भेजीं, पर अस्पताल के पिछले दरवाजे से वह आरुष को लेकर चली गई। सीसीटीवी फुटेज से उसी वक्त यह भी पता लगा कि इकबाल सिंह भी उसका मददगार था। हालांकि रिपोर्ट अनु के नाम लिखकर ही तलाश की जाती रही।
अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे आरुष को
एसपी क्राइम मुकेश कुमार ने पूछताछ की तो अनु ने बताया कि उसने इकबाल सिंह के साथ गुरुवाणी ले ली थी। वह लोग दंपती की तरह रह रहे थे। आरुष की अच्छी परवरिश कर उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे। उसी के सहारे जीवन गुजारना चाहते थे। एएचटीयू उनकी तलाश में दबिश डालती रहती थी। इसलिए वह नाम और पहचान बदलकर हर चार से पांच महीने में कमरा बदल लेते थे।
इकबाल का मकान भी बैंक के कब्जे में
इकबाल सिंह ने बताया कि उसकी पहली शादी एक महिला कांस्टेबल से हुई थी, जो मुजफ्फरनगर में तैनात है। वह बरेली में तैनात हुआ तो अनु से मुलाकात हुई। उसके बाद दोनों साथ रहने लगे। वर्ष 2018 में ही उसने वीआरएस ले लिया था। अनु की पसंद की वजह से उसने आरुष को ले जाने में मदद की। जब वह पापा कहने लगा तो उससे लगाव बढ़ गया। वह उनसे जुदा न हो, इसलिए यहां-वहां भटक रहे थे। उसने इंदिरापुरम में मकान बनाया था। बैंक का लोन जमा न कर पाने की वजह से बैंक ने बंधक बना लिया है। एएचटीयू प्रभारी उसकी पेंशन रुकवाने के लिए लिखापढ़ी करने वाले थे। इससे पहले उसे पकड़ लिया गया।



