Bareilly News: गंगा की बाढ़ से हाईवे और सभी संपर्क मार्ग डूबे, आवागमन बंद

मिर्जापुर के जलमग्न ग्राम पैलानी में चारपाई पर भूसा ले जाते युवक। संवाद
मिर्जापुर। गंगा की बाढ़ के लगातार बढ़ने से खादर में बसे गांवों में बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ती जा रहीं हैंं। जलमग्न घरों में लगभग डेढ़ माह से कैद बाढ़ पीड़ित शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या जलमग्न गांवों में शौच से निवृत होने की है। महिलाओं और बच्चों को इसके लिए काफी परेशानी हो रही है।
जलालाबाद-ढाईघाट, शमशाबाद, सौरिख, विधूना स्टेट हाईवे सहित क्षेत्र के सभी संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। पानी के तेज बहाव में हाईवे पर आवागमन बंद है। हाईवे जगह-जगह पानी के तेज बहाव से कट गया है। इससे ढाईगांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर आगे ग्राम बल्देवपुर मोड़ से ढाईघाट में गंगा के पक्के पुल तक ग्रामीण नहीं पहुंच पा रहे हैं। हाईवे पर आवागमन बंद हो गया है।
आश्रय स्थल और ढाईघाट हाईवे के किनारे पड़े बाढ़ पीड़ितों को तो समाजसेवी रिजवान अहमद और राजस्व निरीक्षक सुखवीर सिंह लेखपालों के साथ सुबह-शाम लंच पैकेट वितरण कर रहे हैं, लेकिन गांवों में घिरे बाढ़ पीड़ितों को सरकारी और समाजसेवी भी मदद नहीं पहुंचा पा रहे हैं। बाढ़ से घिरे ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर मजरा आजाद नगर, इस्लामनगर, मस्जिद नगला, कटैला नगला, लोहार नगला, मोती नगला, बटन नगला, अभिचारपुर, बांसखेड़ा, पैलानी उत्तर, ग्राम पंचायत भरतपुर के ग्राम पंखिया नगला, पकड़िया नगला, धोबियन नगला, भरतपुर, गुटेटी उत्तर ग्राम पंचायत के ग्राम धीयरपुरा, मोहकमपुर, महोलिया, गुटेटी उत्तर, ग्राम पंचायत पृथ्वीपुर ढाई के मजरा अंटा, डड़िया, याकूतपुर, बल्देवपुर, बख्तावरगंज, पिहुआ आदि दो दर्जन गांवों में पेयजल के लिए लगे हैंडपंप बाढ़ के पानी में डूबे हैं। इससे पीड़ितों को बाढ़ के पानी में डूबे हैंडपंपों के पानी से ही प्यास बुझाना मजबूरी हो गई है। सरकारी मदद गांवों तक नहीं पहुंच पा रही है।
नहीं मिल रही मोमबत्ती और केरोसिन
लगभग डेढ़ माह से बाढ़ग्रस्त गांवों की बिजली सप्लाई बंद है। ग्रामीण सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज कर जलमग्न घरों में रोशनी कर रहे हैं, जिनके पास सोलर प्लेट की सुविधा नहीं है वे अंधेरे में रात काट रहे हैं। प्रशासन ने उन्हीं बाढ़ पीड़ितों को एक एक पैकेट मोमबत्ती राशन किट के साथ उपलब्ध कराई गईं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि एक पैकेट मोमबत्ती दो दिन में ही खत्म हो गई है। अब उन्हें अंधेरे में ही रहना पड़ रहा है। केरोसिन का भी वितरण नहीं करा रहा है।
नहीं पहुंच पा रहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं
भीषण गर्मी में भूख-प्यास से तड़पते बाढ़ पीड़ित दूषित भोजन और पानी के इस्तेमाल करने से बुखार, खांसी, जुकाम और चर्म रोगों के शिकार हो रहे हैं। प्रशासन ने ढाईगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बनाए गए आश्रय स्थल में स्थाई हेल्थ कैंप लगा दिया है, लेकिन मेडिकल कैंप का लाभ आश्रय स्थल में शरण लिए लोगों को ही मिल पा रहा है। बाढ़ से घिरे गांवों के रोगी मेडिकल कैंप तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी जलमग्न में दवा का वितरण नहीं कर पा रहे हैं।
बाढ़ग्रस्त गांवों में पशुओं के चारे-पानी की समस्या
बाढ़ से घिरे गांवों के बाशिंदों ने शेल्टर होम, हाईवे किनारे और ईंट भट्ठों पर पशुओं के साथ शरण लिए हुए हैं। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के पशुओं के लिए जो व्यवस्था की वह नाकाफी है। इससे पशुओं की भूख नहीं मिट रही है। ग्रामीण पांच-पांच किलोमीटर तक पशुओं का चारा लेने के लिए बैलगाड़ी लेकर निकल जाते हैं। दिनभर घास काटने के बाद शाम को आश्रय स्थल में लौटते हैं।
गंगा और गर्रा का जलस्तर बढ़ा, गंगा में और छोड़ा गया पानी
शाहजहांपुर। बाढ़ नियंत्रण कक्ष शारदा नहर खंड से जारी रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को गंगा और गर्रा का जलस्तर बढ़ गया है। गंगा में फिर से डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इससे स्थिति और भी खराब हो सकती है।
गंगा का जलस्तर रविवार को 143.55 गेज था, जो कि सोमवार को बढ़कर 143.58 हो गया। गर्रा नदी का जलस्तर रविवार को 144.65 गेज था, जो कि सोमवार को बढ़कर 144.80 गेज हो गया है। गंगा खतरे के निशान के करीब बह रही है। सोमवार को गंगा में नरौरा बैराज से 1,55,338 क्यूसेक पानी, रामगंगा में विभिन्न बैराजों से 15,080 क्यूसेक पानी और गर्रा में 1188 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुबह-शाम खाने के पैकेट बांटे जा रहे हैं। पशुओं के लिए भूसे की भी व्यवस्था की गई है। राहत कार्य के लिए राजस्व टीमें लगातार लगी हुईं हैं। बाढ़ पीड़ितों को समस्याओं के समाधान के प्रयास जारी हैं।
– डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, बाढ़ प्रभारी अधिकारी
रामगंगा ने कई बीघा जमीन का किया कटान, फसलें भी खराब
परौर। रामगंगा मजरा मोहनपुर व मंजा के बीच तेजी से भूकटान कर रही है। इससे कई बीघा जमीन नदी में समा गई है।
क्षेत्र के मजरा नारायण नगर में आंशिक कटान शुरू होने से ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गईं हैं। मोहनपुर बाजार बृजपुरी निवासी राजीव सिंह चौहान, जय वीर सिंह, बाबा शांतानंद, वीरपाल गुर्जर, शेर पाल गुर्जर, जसवीर सिंह गुर्जर, बड़कुई सिंह चौहान, शैलेंद्र सिंह चौहान, महेश्वर सिंह चौहान, उदय भान सिंह चौहान, सुखपाल सिंह गुर्जर, अजय पाल सिंह गुर्जर, लाला महेश सक्सेना, संतोष गुप्ता, ओंकार मिश्रा आदि किसानों के खेत कट गए हैं। संवाद

मिर्जापुर के जलमग्न ग्राम पैलानी में चारपाई पर भूसा ले जाते युवक। संवाद

मिर्जापुर के जलमग्न ग्राम पैलानी में चारपाई पर भूसा ले जाते युवक। संवाद

मिर्जापुर के जलमग्न ग्राम पैलानी में चारपाई पर भूसा ले जाते युवक। संवाद

मिर्जापुर के जलमग्न ग्राम पैलानी में चारपाई पर भूसा ले जाते युवक। संवाद



