Bareilly News: त्वचा, आंख, बालों का फीका पड़े रंग तो हो जाएं सतर्क
बरेली। एल्बिनिज्म यानी रंगहीनता ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के शरीर का कोई अंग या पूरे शरीर का रंग बदल जाता है। यह शरीर के रंग के लिए जिम्मेदार कारक मेलेनिन की कमी से होता है। इसे एल्बिनो कहते हैं। डॉक्टर के मुताबिक एल्बिनो छूने से नहीं फैलता। शुरुआती दौर में इलाज संभव है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक रंगहीनता (ऐल्बिनिजम) त्वचा पर पिगमेंट की कमी से होती है। इसमें त्वचा, बाल, आंख का रंग हल्का होने लगता है। कुछ लोगों में मेलेनिन बहुत कम होता है। यह कमी इंसान ही नहीं बल्कि जानवर और पेड़-पौधे में भी हो सकती है। जिसमें पिगमेंट कम होता है, वह पूरी तरह स्वस्थ होते हैं। अगर किसी व्यक्ति में हल्के सफेद दाग शरीर के किसी हिस्से से शुरू हों तो उन्हें चिकित्सक से संपर्क कर इलाज शुरू करना चाहिए, ताकि मेलेनिन की कमी दूर हो सके। शुरुआत में इलाज संभव है, फैलने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।
डॉ. प्रसाद के मुताबिक ज्यादातर केस में एब्लिनो की समस्या आंखों से ही शुरू होती है। आंखे भूरी दिखती हैं और कभी-कभी आखें गुलाबी या लाल भी दिख सकती हैं। एक बार जब शरीर के किसी अंग से इसके फैलने की शुरुआत होती है तो इसे रोकना कठिन होता है। इसका कोई बेहतर इलाज उपलब्ध नहीं है। आखों पर ही विशेष प्रभाव होता है, इसलिए आंख और त्वचा की देखभाल करना जरूरी होता है।
बीमारी के लक्षण
– त्वचा का रंग हल्का होना या बिगड़ना।
– बालों का रंग सफेद या ब्राउन हो जाना।
– आंखों का रंग हल्का नीला, भूरा होना।
– हल्की धूप में आंखों का रंग लाल होना।
– भौहों का रंग बदलना और बढ़ते जाना।
बचाव के उपाय
– आंखों व त्वचा की जांच नियमित कराएं।
– जरूरत हो तो चश्मा लगा लेना चाहिए।
– तेज धूप से बचें।
– सूती कपड़े पहनें।
– 50 से ज्यादा एसपीएफ क्षमता की सनस्क्रीन लगाएं।



