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Bareilly News: चॉकलेट… कम मात्रा में खाएंगे तो सेहत के लिए भी मीठी

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बरेली। चॉकलेट अब सिर्फ बच्चों की पसंद नहीं रही। इसके चलन ने बाजार में अपनी जगह मिठाई के तौर पर भी बना ली है। रेडीमेड दूसरी मिठाई के बजाय चॉकलेट का इस्तेमाल अब अब त्योहारों और बड़े कार्यक्रमों में होने लगा है। उपहार के तौर पर चॉकलेट लोगों की पसंद बनने लगी है। इसी वजह से बाजार में इसकी मांग बढ़ गई है। सीमित मात्रा में चॉकलेट खाने से तनाव कम होता है। कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है। सामान्य मात्रा में इसके सेवन से हृदय संबंधित समस्याओं का जोखिम कम होता है।

डायटीशियन विभा कटियार बताती हैं कि चॉकलेट के जितने फायदे हैं, उतने नुकसान भी हैं। फिट रहने के लिए चॉकलेट के सेवन को नियंत्रित करना होगा। यह हाई कैलोरी पदार्थ है। इसमें कैफीन भी होती है, जोकि अस्थायी तौर पर फायदा पहुंचाती है, लेकिन मोटापा बढ़ने, कैविटी, मधुमेह का कारण बनती है।

डायटीशियन बताती हैं कि काकाओ पेड से निकलने वाले कोकोआ बीन से चॉकलेट बनती है। इसका स्वाद काफी कड़वा होता है। इसको स्वादिष्ट बनाने के लिए दूध और चीनी का बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में मिलने वाली 100 ग्राम चॉकलेट में 14 चम्मच चीनी डाली जाती है। इसका मतलब 100 ग्राम चॉकलेट में 57 ग्राम चीनी पड़ती है। स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को 36 से 25 ग्राम चीनी का सेवन पूरे दिन में करना चाहिए। इसी के साथ दूध की मिठास भी चॉकलेट में मिलती है। कम मीठी डार्क चॉकलेट में कैफीन की मात्रा बहुत होती है। इससे अस्थायी तौर पर मूड अच्छा हो जाता है। मगर इसकी आदत भी लग सकती है। यही कारण है कि चॉकलेट खाने से मोटापा, मधुमेह, बल्ड प्रेशर का बढ़ना, कैविटी और मौसम बदलने से चिड़चिड़पन भी बढ़ जाता है।

माना जाता है कि सात जुलाई, वर्ष 1550 में पहली बार यूरोप में चॉकलेट बनाई गई थी। एज्टेक संस्कृति में चॉकलेट सिर्फ एक स्वादिष्ट मिठाई या कड़वा पेय नहीं था। बल्कि, इसे मुद्रा के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता था। कुछ देश हैं, जहां पर चॉकलेट दिवस को लेकर अलग मान्यता है।


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