Bareilly News: आईवीआरआई ने दीं 40 से ज्यादा तकनीक और लंपी वैक्सीन
बरेली। कृषि शिक्षा अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने 150 से ज्यादा उद्योग, सरकार और एनजीओ को 40 तकनीकें मुहैया करा चुका है। गोवंश को लंपी डिजीज से निजात दिलाने के लिए लंपी प्रो इंड वैक्सीन विकसित की है। यही वजह है कि पहली बार आवेदन में ही राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में संस्थान को छठी रैंक मिली है।
यह जानकारी मंगलवार को आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने दी। कहा कि इस रैंकिंग से संस्थान में पशु चिकित्सा से संबंधित छात्राें की संख्या बढ़ेगी। संस्थान में कई और पाठ्यक्रम शुरू होंगे। आईवीआरआई ने 18 टीके, 14 नैदानिक, 88 पशु चारा प्रौद्योगिकी, 13 पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी, 23 इंजीनियरिंग डिजाइन, चार हर्बल फॉर्मूलेशन प्रौद्योगिकी उत्पाद और एक अपशिष्ट से प्रौद्योगिकी विकसित की है।
वहीं मुहैया कराई गई 40 तकनीकों में 11 वैक्सीन, सात डायग्नोस्टिक्स, छह इंजीनियरिंग डिजाइन, दो पशु चारा और पोषण, सात पशुधन उत्पाद, चार चिकित्सकीय और तीन विविध का व्यवसायीकरण किया गया है।
टीके जिन्होंने गोवंश और पशुओं को किया रोगमुक्त
हाल ही में लंपी प्रो वैक्सीन विकसित करने में आईवीआरआई को सफलता मिली है। इससे पहले इम्प्रूव्ड ब्रूसेल्ला एबॉर्टस एस-19 स्ट्रेन, लाइव एटेन्यूएटेड सीएसएफ, गोटपॉक्स, पीपीआर, शीपपॉक्स, लुम्पी स्किन डिजीज, स्वाइन सेप्टिक आदि विकसित किए हैं। आईबीडी, एनडीवीए आईबीवी, एफएमडी, जेई, ब्लूटंग, पीपीआर, रोटावायरस के लिए भी निदान विकसित किए गए हैं।
फ्रैक्चर फिक्शन और पशु नस्ल सुधार का कार्य
आईवीआरआई वैज्ञानिकों ने खनिज ब्लॉक, मिश्रण, एनकैप्सुलेटेड प्रोबाॅयोटिक्स, मांस-दूध उत्पाद, हर्बल एसारिसाइड, एंटी डायरियल हर्बल फॉर्मूलेशन, जयगोपाल वर्मीकल्चर, फ्रैक्चर फिक्सेशन, फीटल एक्सट्रैक्शन, सिस्ट एबलेशन आदि विकसित किया है। जल्द ही प्रजनन, स्वास्थ्य देखभाल, कल्याण, पोषण, मूल्यवर्धित दूध-मांस उत्पाद, वन्य जीवन प्रबंधन, नैदानिक तकनीक, सर्जिकल हस्तक्षेप, जैविक पशुधन उत्पादन, टीकाकरण, रेडियोलॉजी, उद्यमिता विकास, प्रिवेंटिव वेटनरी मेडिसिन आदि के लिए डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, व्यवसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे।



