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Bareilly News: स्वावलंबन से खड़ा किया सफलता का कारवां

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बरेली। जब ईश्वर ने हाथ-पांव दिए और माता-पिता ने हुनर सिखाया तो रोजगार के लिए किसी और के आगे हाथ क्यों फैलाएं… यह कहना है धरपुरा गांव की रहने वाली ज्ञानदेवी का। ज्ञानदेवी पेशे से जरी कारोबारी हैं। इन्होंने तीन साल पहले काम शुरू किया। न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि क्षेत्र की महिलाओं को भी रोजगार दे चुकी हैं।

वह बताती हैं कि डेढ़ लाख की लागत से अपना काम शुरू किया था। आज स्थिति यह है कि करीब 140 महिलाएं उनके साथ काम करती हैं। अब भी लगातार जरूरतमंद महिलाओं को काम सिखा रही हैं। अपने काम के जरिये आय का साधन भी मुहैया कराती हैं। आज वह सफल जरी कारोबारी बन चुकी हैं। खुद बाजार जाती हैं। व्यापारियों से मिलकर बात करती हैं। नमूने दिखाती हैं। काम का ऑर्डर लेती हैं। अन्य महिलाओं को भी यही तौर तरीका सिखा रही हैं।

ऐसे आया विचार

ज्ञानवती बताती हैं कि पहले गांव की महिलाओं के साथ वह खुद भी रोजगार की तलाश करती थीं। बाहरी लोग रोजगार तो देते लेकिन काम की कीमत के बराबर पैसा नहीं मिलता। काम ज्यादा लेते और पैसा कम मिलता था। ज्यादा पैसे मांगने पर कई बार काम भी नहीं मिलता था। इसी से सोचा कि हुनर तो हमारा अपना है। पैसे जुटाकर काम शुरू किया जाए और साथ की महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा जाए। धीरे-धीरे समूह से पैसा मिला तो काम और आगे बढ़ाया।

ये आईं चुनौतियां

वह बताती हैं कि माल तैयार करना तो आता था, लेकिन उसे बेचने का तरीका नहीं पता था। धीरे-धीरे व्यापारियों की तलाश की ताकि ऑर्डर पर काम मिल सके। जब इसमें असफल हुईं तो खुद कपड़ा खरीदकर आइटम तैयार करना शुरू किया। बाजार में नमूने दिखाकर ऑर्डर लिया। कम कीमत और उम्दा कारीगरी की वजह से धीरे-धीरे लोग काम को पसंद करने लगे। ऑर्डर बढ़ते गए। अब अपना माल तैयार कराकर भी बाजार में सप्लाई करती हैं।

वर्जन

जरी के इस काम में उनके साथ काम करने वाली महिलाएं पांच से छह हजार रुपये महीना कमा लेती हैं। सारा खर्च घटाने के बाद उन्हें भी 12 से 15 हजार रुपये महीना बच जाता है। यही उनकी आय का साधन है। -ज्ञानवती


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