Bareilly News: मुरादाबाद के शातिरों ने बिहार के बेरोजगारों को मामूली कीमत किया सेट, सॉल्वर के तौर पर उतारा
बरेली। उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में एसटीएफ की पैनी नजर के बाद भी सेंध लगाने जैसे हालात बन गए। ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद नतीजा निकला है कि मुरादाबाद के मास्टरमाइंड कई लोगों ने बिहार के बेरोजगार युवकों (सॉल्वरों) को मामूली कीमत में सेट कर परीक्षा में उतार दिया। इनमें कई के सफल होने का भी अंदेशा है। मुरादाबाद निवासी सरगना नाजिम के लेखपाल भर्ती परीक्षा पास करने की जानकारी अफसरों को हुई तो वे भी चौंक गए। तस्दीक करने के लिए टीम मुरादाबाद जाएगी।
बिहार के कई नौजवान बेरोजगारी के दौर से जूझ रहे हैं। इसका फायदा मुरादाबाद के शातिरों ने उठाया। करीब पांच साल पहले हुए आवेदनों के आधार पर यह परीक्षा हुई। इसलिए इस खेल के पुराने खिलाड़ियों ने इसमें पूरी ताकत झोंक दी। नाजिम जैसे लोगों ने 10 से 15 लाख रुपये में परीक्षार्थियों से सेटिंग की और बिहार के कोचिंग सेंटरों से बेरोजगार लड़कों को एक से डेढ़ लाख में पेपर देने के लिए तैयार कर लिया। इन्हें एडवांस में तो सिर्फ 25 या 30 हजार रुपये ही दिए गए। इनमें से अधिकतर युवक सिविल सर्विसेज व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। कुछ स्नातक कर रहे थे जो शुरू से पढ़ाई में होशियार रहे हैं।
सरगना नाजिम और अन्य आरोपियों से हाफिजगंज थाने में पूछताछ की गई। पता लगा कि उसने अपने गांव से प्रधानी का चुनाव लड़ा था और केवल 11 वोटों से हार गया। चौंकाने वाली जानकारी ये भी मिली कि नाजिम भी सॉल्वर के जरिये लेखपाल भर्ती परीक्षा पास कर चुका है। हालांकि काफी प्रयास के बाद भी पुलिस और एसटीएफ इसकी पुष्टि नहीं कर सकी। अब तस्दीक के लिए मुरादाबाद जिला प्रशासन से संपर्क साधकर एक टीम वहां भेजी जाएगी।
नाजिम को अपना पेपर भी दिलाना था, खतरा भांपकर टाल दिया
जांच पड़ताल में यह भी पता चला कि सोमवार को सुबह की पाली में मास्टरमाइंड नाजिम ने भी किसी सॉल्वर से अपना पेपर दिलाने की बात की थी। नाजिम का सेंटर पीलीभीत रोड के जय नारायण विद्यालय में पड़ा था और संदीप उसकी जगह पेपर दे सकता था। इस बीच नाजिम को खतरा महसूस हुआ। उसने अपना पेपर नहीं दिया। वह दूसरे लोगों का पेपर कराकर मोटी रकम बटोरने की तैयारी में था मगर पकड़ा गया।
दूसरे अभ्यर्थियों और संदिग्धों के नाम खुलेंगे
सॉल्वर गैंग की धरपकड़ के बीच ऐसे कई अभ्यर्थियों और लोगों के नाम सामने आए हैं जो मौके पर नहीं थे। सॉल्वरों से अपनी परीक्षा कराने वाले असली परीक्षार्थी अपने घरों या बरेली में ही दूसरे स्थानों पर बैठकर व्हाट्सएप कॉल के जरिये शातिरों के संपर्क में थे। इनमें से ज्यादातर को यह भी नहीं पता था कि उनकी जगह कौन और कितने पैसे में परीक्षा दे रहा है। इनमें से कुछ के नाम एफआईआर में खोेले गए हैं तो कुछ के बाद में खोलने की तैयारी है।
परीक्षा में पकड़े गए सॉल्वरों व अन्य आरोपियों समेत दस लोगों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया है। अन्य संभावित आरोपियों का भी पता लगाया जा रहा है। विवेचना में सही तथ्य स्पष्ट किए जाएंगे। इसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
-राहुल भाटी, एसपी सिटी



