Bareilly News: भरतनाट्यम की मुद्राओं में दिखी नटराज की छवि
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार को गुरु अंबाली प्रहराज के निर्देशन में शिष्यों ने भरतनाट्यम का अद्भुत प्रदर्शन किया। शिव स्तोत्र की प्रस्तुति में नटराज तो गणेश वंदना में विनायक की छवि दिखी। विद्यार्थियों ने जतिस्वरम में स्वर, राग और ताल के संतुलन को प्रदर्शित किया। वरनम में अभिनय के साथ भरतनाट्यम के तकनीकी पक्ष को नृत्य के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा। शब्दम में स्वर को महत्व देते हुए नृत्य किया। कीर्तनम में नृत्य के जरिये भगवान की स्तुति की।
विद्यार्थियों ने तिल्लाना में भरतनाट्यम के तकनीकी पक्ष को उभारते हुए अभिनय के साथ नृत्य किया। गुरु अंबाली प्रहराज ने बताया कि मंदिरों में देवदासी के जरिये इसकी शुरुआत हुई। पहले इसे दासीअट्टम नाम दिया गया। बाद में समाज ने स्वीकृति दी और यह विधा भरतनाट्यम के रूप में विख्यात हुई। उन्होंने भरतनाट्यम के विकास का श्रेय तमिलनाडु की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना ई कृष्णा अय्यर और रुक्मिणी देवी को दिया। भरतनाट्यम के विद्यार्थी सताक्षी, मायरा, तानिशी, काव्या, भाव्या, संस्कृति, आद्या, शाम्भवी ने कोलकाता से आए अतिथि सुकुमार जी कुट्टी के स्वर और मलय कुमार डे के मृदंगम पर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर गुरुओं के साथ उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, ट्रस्टी आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, सुभाष मेहरा, सुरेश सुंदरानी, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डाॅ. अनुज कुमार सहित गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।



