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Bareilly News: चौकी प्रभारी पर भ्रष्टाचार के आरोप, नजरों में खटकते थे नीरज

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बरेली। हेड कांस्टेबल नीरज चौधरी ने सुसाइड नोट लिखकर जीवन खत्म करने की कोशिश अनायास ही नहीं की। वह काफी समय से घुट-घुटकर जी रहे थे। उन्होंने अपनी परेशानी पूर्व एसओ, यहां के संभ्रांत लोगों और पत्रकारों तक को बताई थी। उनके मुताबिक, चौकी में चल रहे भ्रष्टाचार व वसूली के खेल की खिलाफत करने से वह निशाने पर आ गए हैं। चौकी इंचार्ज और सिपाही उन्हें बात बात पर अपमानित करते हैं। इसे वह बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं।

नीरज वर्ष 1991 बैच के सिपाही हैं। प्रमोशन से हेड कांस्टेबल बने। कुछ दिन पहले ही दरोगा की ट्रेनिंग लेकर लौटे थे। वह मूल रूप से बिजनौर जिले के थाना हल्दौर में गांव खतापुर के निवासी हैं। करीब दो साल चार महीने से वह थाना शाही की दुनका पुलिस चौकी में तैनात हैं। बताते हैं कि लंबा समय यहां गुजारने से चौकी से जुड़े करीब 21 गांवों के लोगों के साथ ही यहां के संभ्रांत लोगों से उनके बेहतर संबंध हैं। अधिकतर लोग उनके व्यवहार के कायल हैं।

नीरज ने ही कुछ दिनों पहले लोगों व पत्रकारों को बताया था कि वह चौकी प्रभारी व उनके मुंह लगे सिपाही अमित शर्मा के निशाने पर आ गए हैं। आरोप लगाया कि ये लोग इलाके में हो रहे गलत कार्यों को संरक्षण दे रहे हैं और बदले में वसूली कर रहे हैं। इस बारे में टोका तो वह अपमानित करने लगे। नीरज ने यह भी बताया था कि अपने साथ हो रहे रवैये की शिकायत पूर्व एसओ बलवीर सिंह से की भी थी। उन्होंने निस्तारण का आश्वासन भी दिया पर कुछ हुआ नहीं। इस बीच उनका तबादला हो गया। नीरज चाहते थे कि उन्हीं को चौकी से कहीं और भेज दिया जाए पर कांवड़ व अन्य उलझनों में फंसे नए एसओ को वह दिल की बात बता नहीं पा रहे थे। इस बीच किसी बात पर वह इतने खफा हुए कि खुद को गोली मार ली। क्षेत्र के लोग नीरज के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।

घायल हेड कांस्टेबल को देखने पहुंचे अधिकारी

हेड कांस्टेबल ने सरकारी इन्सास रायफल से दो गोली चलाई थीं जिनमें से एक ही उन्हें लगी। गोली उनकी गर्दन की एक हड्डी को तोड़ती पार चली गई है। मेरठ में उनका ऑपरेशन किया गया है। इधर, घटना की सूचना पर विभाग में हलचल रही। एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल, सीओ मीरगंज हर्ष मोदी ने मेडिकल कॉलेज भोजीपुरा जाकर उनका हाल जाना। अधिकारी मेरठ के डॉक्टरों के संपर्क में भी हैं।

फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

कमरे के बाहर बरामदे में नीरज ने अपना मोबाइल फोन वाटर कूलर पर रखा और अपनी बाइक के पास खड़े होकर गोली मार ली। फोरेंसिक टीम रात तीन बजे घटनास्थल पर पहुंची। काफी देर तक जांच कर नमूने लिए। फर्श पर दो कारतूस के खोखे पड़े थे। दो जिंदा कारतूस मिले। राइफल की मैगजीन को खोलकर देखा तो उसमें 11 और जीवित कारतूस मिले।

सिपाही ने जताई हैरत

हेड कांस्टेबल को इलाज के लिए लेकर गए चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार और कांस्टेबल अमित शर्मा वापस चौकी नहीं आए। उन्हें फरार बताया जा रहा है। चौकी इंचार्ज का मोबाइल नंबर बंद है। सिपाही अमित शर्मा से घटना के बाद ही बात हुई तो बताया कि हेड कांस्टेबल नीरज से कोई विवाद नहीं था। रात में गश्त करके साथ लौटे हैं। पता नहीं ऐसा आत्मघाती कदम उन्होंने क्यों उठा लिया।


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