Bareilly News: सिस्टम के सुराख पर मुआवजे का पैबंद… दैवी आपदा बताकर करंट से छात्रा की मौत का मामला रफा-दफा
बरेली। जिस घटना ने पूरे शहर को डरा दिया, उसे अफसरों ने इस अंदाज में रफा-दफा कर दिया कि ””जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ में है… इसमें बिजली विभाग का क्या कुसूर?”” दैवी आपदा मानकर घटना का जिम्मेदार तय करने के लिए विभाग के मुखिया ने जांच तक नहीं कराई। सिस्टम के सुराख को छिपाने के लिए परिजनों को पांच लाख रुपये देकर मुआवजे का पैबंद लगा दिया।
घटना सात जुलाई की है। किला क्षेत्र में ट्रांसफार्मर की जाली में करंट उतरने से 11वीं की छात्रा लक्ष्मी की मौत हो गई थी। उसका कुसूर बस इतना था कि स्कूल जाते समय वह बारिश के पानी में फिसलकर ट्रांसफार्मर की जाली से टकरा गई थी। इस घटना ने हर अभिभावक को झकझोर कर रख दिया है। उन्हें स्कूल-कॉलेज जाते, खेलते-कूदते बच्चों की चिंता सताने लगी है। मगर बिजली विभाग के अफसरों पर इसका कोई असर नहीं है।
अफसरों ने भले ही इस प्रकरण पर मिट्टी डालने की कोशिश की हो, लेकिन अमर उजाला ने विभाग के रिटायर्ड अफसरों और जानकारों से बातचीत की तो उन्होंने इस घटना के जिम्मेदार तय किए। हम वह प्रक्रिया पाठकों के सामने रख रहे हैं, जिसके न होने से यह घटना हो गई।
जिम्मेदार-1
फीडरवार तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती होती है। इनकी जिम्मेदारी होती है कि वे अपने क्षेत्र के ट्रांसफार्मरों की जाली और खंभों की समय-समय पर चेकिंग कराएं। कहीं करंट लीक हो रहा हो तो वरिष्ठ अफसरों को सूचना दें। उसे ठीक कराएं। किला पुलिस चौकी के पास लगे ट्रांसफार्मर की चेकिंग नहीं कराई गई। इस घटना के लिए तकनीकी कर्मचारी सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
जिम्मेदार-2
फीडरवार तकनीकी कर्मचारियों के पर्यवेक्षण अधिकारी अवर अभियंता (जेई) हैं। यदि जेई ने अधीनस्थ के काम की मॉनीटरिंग की होती तो ट्रांसफार्मर की लीड से करंट लीक होने की जानकारी पहले हो जाती। उसे ठीक करा लिया गया होता। छात्रा की मौत के मामले में जेई की लापरवाही और अनदेखी भी जिम्मेदार है।
जिम्मेदार-3
जेई के काम का पर्यवेक्षण उप खंड अधिकारी (एसडीई) करते हैं। बारिश में जलभराव होता है। कई ट्रांसफार्मरों के परिसरों में पानी भर जाता है। यह बात विभाग को पहले से पता है। जलभराव से करंट उतरने की भी आशंका थी। फिर भी एसडीई ने जलभराव के समय ऐसे ट्रांसफार्मरों की जांच एक साथ नहीं कराई। यदि ऐसा होता तो घटना को रोका जा सकता था।
जिम्मेदार-4
विभाग में इस तरह की जांच पड़ताल की कोई व्यवस्था नहीं है तो इसे बनाने और लागू कराने की जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) की है। उन्होंने भी झूलते तारों और जानलेवा ट्रांसफार्मरों की निगरानी कराने में चूक की।
जेई का दावा…सही या गलत
मैंने दस दिन पहले ही किला चौकी के ट्रांसफार्मर की जाली की जांच कराई थी। तब करंट नहीं आ रहा था। मुझे लगता है कि इंसुलेशन डैमेज होने से बैरिकेडिंग में करंट उतरा होगा। जेई का यह दावा कितना सही है, जांच होने पर ही स्पष्ट हो सकता है।
अधीक्षण अभियंता विकास सिंघल का वर्जन
सवाल- क्या ट्रांसफार्मर की बैरिकेडिंग पर करंट आना चाहिए था?
जवाब- ट्रांसफार्मर सुरक्षित लगा था। बारिश में नाला चोक होने से जल निकासी नहीं हो सकी। इस दौरान लीड का इंसुलेशन कमजोर होने से करंट लीक हो गया और छात्रा हादसे का शिकार हो गई।
सवाल- करंट आया तो किसी की जवाबदेही क्यों नहीं तय की?
जवाब- मेरी नजर में यह घटना दैवी आपदा है। किसी की जवाबदेही नहीं बनती। पानी न भरता तो यह हादसा न होता।
सवाल-आगे हादसे न होने पाएं, इसके लिए क्या करेंगे?
जवाब- करना क्या? मैं तो यही कहूंगा जब बारिश और जलभराव हो तो ट्रांसफार्मर, खंभा और केबिल के पास न जाएं।
सवाल- ट्रांसफार्मर के बैरिकेडिंग पर करंट का खतरा है तो क्या चेक नहीं कराएंगे?
जवाब- कर्मचारियों की संख्या जरूरत से काफी कम है। शहर में 2400 ट्रांसफार्मर और करीब 10,000 लीड हैं। सभी की चेकिंग संभव नहीं है।



