Bareilly News: खत्म हो रही हरियाली, अस्तित्व के लिए जूझ रहीं नदियां
बरेली। आधुनिकता की दौड़ में लोग पर्यावरण और भविष्य की चुनौतियों को लेकर संजीदा नहीं हो रहे। हर वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस हमें इसकी याद दिलाता है। इसके बाद भी हम प्रकृति संरक्षण को लेकर जागरूक नहीं हो रहे। पिछले दो दशक में हालात ज्यादा बिगड़े हैं। एक ओर हरियाली घटी है तो दूसरी ओर नदियां अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही हैं। इसका सीधा असर पर्यावरण और जैव विविधता पर पड़ रहा है।
पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण के तमाम अभियानों के बावजूद भविष्य की चुनौतियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। जिले में बहने वाली प्रमुख नदियों की बात करें तो नकटिया और किला नदियां नाले में तब्दील होकर लगभग अस्तित्व खो चुकी हैं। बहगुल और अरिल में पानी मानसून के दौरान ही दिखता है। रामगंगा की हालत भी प्रदूषण के कारण बदतर होती जा रही है। दूसरी ओर हरियाली के लिहाज से बरेली की स्थिति काफी बदतर है। करीब 4120 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले जिले में एक फीसदी भी वन क्षेत्र नहीं है। जनवरी से जून 2023 तक ही अधिकारिक तौर पर जिले में सड़कों के चौड़ीकरण के लिए 11,000 से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं। बरेली-रामनगर रोड के चौड़ीकरण के लिए 10,000 पेड़ काटे जाने हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष वृहद पौधरोपण होता है, लेकिन हरियाली नहीं बढ़ रही। पौधरोपण अभियान के दौरान 2020 में 26,36,87 पौधे रोपे गए। 2021 में 31,40,220 और 2022 में 37,47,235 पौधों का रोपण किया गया। इस बार भी 47.72 लाख पौधे रोपे जा रहे हैं, लेकिन हरियाली नहीं बढ़ी। दूसरी ओर नदियों में पुनर्जीवन के लिए भी कोई काम नहीं हुए।
वर्जन
वन विभाग की ओर से रोपे गए 90 फीसदी से अधिक पौधे जीवित हैं। अन्य विभाग भी ध्यान दें तो निश्चित रूप से जिले में हरियाली का क्षेत्रफल बढ़ेगा। – समीर कुमार, डीएफओ



