Bareilly News: जांच के लिए आज फिर अस्पताल पहुंचेगी टीम, खंगालेगी अभिलेख
बरेली। तोतलेपन का इलाज कराने पहुंचे बच्चे का खतना करने के प्रकरण में जांच टीम ने एम खान अस्पताल में सोमवार को भी दस्तावेजों की पड़ताल की। कुछ अभिलेख उपलब्ध न होने की वजह से टीम मंगलवार को भी अस्पताल में जांच करेगी। सीएमओ ने जांच के बाद देर शाम तक रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है।
सीएमओ के मुताबिक, शासन ने 24 घंटे में जांच कर कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। प्रथम दृष्टया जांच में अस्पताल प्रबंधन को सही सूचना न दिए जाने का दोषी मानते हुए लाइसेंस निलंबन की सूचना शासन को भेज दी गई है। अग्रिम जांच के लिए 48 घंटे का वक्त मांगा था। टीम अभी जांच कर रही है। सोमवार को भी टीम ने बच्चे के इलाज संबंधी अब हुई जांच में अस्पताल को चिकित्सकीय लापरवाही का दोषी नहीं माना। मगर बच्चे के परिवार को पूरी तरह भरोसे में नहीं लेने की बात पता चली है। दोनों ही पक्ष अपनी जगह सही प्रतीत हो रहे हैं। मंगलवार को जांच पूरी होने के बाद किसी नतीजे पर पहुंचा जाएगा।
अस्पताल में आवाजाही रही बंद, लाैटे मरीज
लाइसेंस निलंबित होने के बाद अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी आदि चिकित्सकीय सेवाएं बंद रहीं। जो मरीज भर्ती थे, अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें फिलहाल कहीं शिफ्ट नहीं किया है। जो मरीज इलाज कराने पहुंचे थे, उन्हें कहीं और इलाज कराने की बात कहकर स्टाफ ने लौटा दिया। प्रकरण पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया गया पर उन्होंने कोई जानकारी देने से इन्कार कर दिया।
डॉक्टर बोले : ढाई साल के बच्चे का नहीं होता जीभ का ऑपरेशन
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक तीन साल से पहले बच्चे के तोतलेपन के इलाज के लिए ऑपरेशन नहीं होता है। बच्चा हिंदी वर्णमाला के शब्दों का उच्चारण क्रमवार सीखता है। तीन साल बाद ही वह साफ बोल पाता है। अभिभावकों को जल्दबाजी नहीं करानी चाहिए। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक के अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने कहा कि तीन साल उम्र पूरी करने के बाद भी बच्चा स्पष्ट न बोल सके तो विशेषज्ञ से परामर्श कराना चाहिए। वरिष्ठ सर्जन डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने भी तीन साल उम्र पूरी होने के बाद ही ऑपरेशन की बात कही है।



