Bareilly News: पुष्पवर्षा से हुआ राजगद्दी शोभायात्रा का स्वागत
फरीदपुर/आंवला/बहेड़ी। भगवान राम की राजगद्दी शोभायात्रा बृहस्पतिवार को फरीदपुर, आंवला और बहेड़ी में निकाली गई। जगह-जगह पुष्पवर्षा से शोभायात्रा का स्वागत हुआ। इस दौरान जय श्रीराम के जयकारों से सड़कें गुंजायमान रहीं।
फरीदपुर में प्राचीन रामलीला कमेटी की ओर से मोहल्ला परा से भगवान राम की राजगद्दी शोभायात्रा बैंडबाजों के साथ निकाली गई। सबसे आगे विजय पताका लिए लोग चल रहे थे। रथ पर भगवान राम, जानकी, लक्ष्मण विराजमान थे। भरत, शत्रुघ्न, हनुमान, सुग्रीव, अंगद और मां काली, भगवान शंकर, देवी पार्वती की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रमुख मार्गों से होते हुए शोभायात्रा मेला मैदान पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान राजेश चंद्र मिश्रा, रमेश चंद्र शुक्ला, रजत कुमार वर्मा, वीरू वर्मा, डॉ. मनोज सक्सेना, अशोक मौर्य, प्रमोद बलधारी आदि मौजूद रहे।
आंवला में राजगद्दी शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत हुआ। गंज त्रिपोलिया स्थित सनातन धर्मशाला पहुंचकर शोभायात्रा संपन्न हुई। राजगद्दी शोभायात्रा का गोविंद गुप्ता, मीना मौर्य आदि ने स्वागत किया। रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम के राजतिलक की लीला का सजीव मंचन हुआ। इसके साथ ही 22 दिन से चल रहे रामलीला मंचन का विश्राम हो गया। चेयरमैन सैयद आबिद अली, पूर्व चेयरमैन संजीव सक्सेना, रामनिवास मौर्य, रामवीर प्रजापति, वीरसिंह पाल, सुनील श्रीवास्तव, राजेश सक्सेना आदि का विशेष सहयोग रहा।
बहेड़ी में भगवान श्रीराम की भव्य राजगद्दी गाजे-बाजे के साथ दोपहर दो बजे निकाली गई। शोभायात्रा में सबसे आगे भगवान गणेश की प्रतिमा, पीछे अलग-अलग रथों पर सवार गुरु विश्वामित्र व गुरु वशिष्ठ, श्रीराम और लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की झांकियां चल रहीं थीं। भोले बाबा की मढ़ी, नैनीताल रोड, मुख्य मार्ग से होते हुए शोभायात्रा तहसील स्थित जनकपुरी परिसर पहुंची। यहां भगवान श्रीराम की आरती हुई। मेला मैदान पहुंचकर शोभायात्रा संपन्न हुई। एसडीएम अजय कुमार उपाध्याय, सीओ डॉ. तेजवीर सिंह, पालिकाध्यक्ष रश्मि जायसवाल, इंस्पेक्टर श्रवण कुमार सिंह, बीडीओ गरिमा सिंह, गन्ना समिति सचिव राजीव सेठ आदि मौजूद रहे।
मेघनाद के पुतले का हुआ दहन
नवाबगंज। रामलीला मैदान में चल रही श्रीराम लीला में बृहस्पतिवार को मेघनाद और अहिरावण वध की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद मेघनाद के पुतले का दहन हुआ। मेघनाद की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी सुलोचना उसका सिर गोद में रखकर सती हो जाती है। पुतला दहन के दौरान आतिशबाजी भी हुई। संवाद



