Bareilly News: ब्रिटिश झंडा जलाकर बरेली कॉलेज में फहराया था तिरंगा
बरेली। 186 वर्षों की एतिहासिक विरासत समेटे बरेली कॉलेज की स्वतंत्रता संग्राम में भी अहम भूमिका रही। ब्रिटिश हुकूमत की ईंट से ईंट बजाने के लिए कॉलेज के छात्रावास में क्रांतिकारियों की बैठकें होती थीं। वर्ष 1937 में बरेली कॉलेज में ब्रिटिश झंडा जलाकर तिरंगा फहराया गया था।
वर्ष 1857 में मेरठ से शुरू हुई क्रांति के दौरान बरेली में भी बगावत हुई थी। इसमें बरेली कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इसमें बरेली कॉलेज के शिक्षक मौलवी महमूद अहसन ने अहम भूमिका निभाई। क्रांति का बिगुल फूंकने में फारसी विषय के अध्यापक मौलवी कुतुबशाह ने कदम बढ़ाया तो कारवां बनता गया। ब्रिटिश हुकूमत ने गिरफ्तार फांसी की सजा सुनाई थी पर काला पानी जेल भेज दिया गया।
कॉलेज के राष्ट्रवादी छात्रों ने यंग स्टूडेंट्स एसोसिएशन की स्थापना की थी। इसके पहले अध्यक्ष प्रताप चंद्र आजाद बने। वर्ष 1937 में छात्र कृपानंदन ने कॉलेज हॉल पर फहरा रहे ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक को जलाकर तिरंगा लहरा दिया था। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। काॅलेज के छात्रों ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया। सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर छात्रों ने आजाद हिंद फौज को छात्र संघ का सारा पैसा देने का प्रस्ताव पारित किया था। प्रकरण पर अंग्रेज कमिश्नर ने प्राचार्य मदन मोहन से इस्तीफा लिया था।
बगावत के बाद 14 दिनों तक बंद रहा कॉलेज
22 मई 1857 को कॉलेज के शिक्षक मौलवी महमूद ने बगावत का बिगुल फूंका था। इसके बाद बरेली काॅलेज को 14 दिनों के लिए बंद कर दिया गया। कॉलेज के छात्र मुहम्मद अली खान उर्फ जैमीग्रीन को लखनऊ के ब्रिटिश फौजी कैंप की जासूसी के दौरान पकड़कर फांसी दी गई थी। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान वर्ष 1930 में छात्र पंडित दरबारी लाल शर्मा ने कॉलेज का बहिष्कार कर नमक आंदोलन में हिस्सा लिया था।



