Budaun News: पुरातत्व विभाग ने कोर्ट में अपना जवाब किया दाखिल
नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद प्रकरण में अब 30 जुलाई को होगी सुनवाई
मंगलवार को वकीलों की हड़ताल के चलते नहीं हो सकी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। अखिल भारतीय हिंदू महासभा द्वारा भगवान नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले में मंगलवार को पुरातत्व विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया। मंगलवार को वकीलों की हड़ताल के कारण इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अब सिविल जज सीनियर डिवीजन लीलू ने सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की है।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश सिंह पटेल को अधिकृत करते हुए उनकी ओर से एक सिविल वाद दायर किया गया था। सिविल वाद में इंतजामिया कमेटी, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, यूनियन ऑफ इंडिया द्वारा सेक्रेटरी नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कलेक्टर बदायूं और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को पक्षकार बनाया है।
मंगलवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मेरठ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत ने पुरातत्व विभाग की ओर से डीजीसी सिविल संजीव वैश्य के माध्यम से अपना पक्ष रखा। पुरातत्व विभाग के अनुसार भगवान श्री नीलकंठ महादेव आदि बनाम इंतजामिया कमेटी का मुकदमा उपासना स्थल विशेष उपबंध अधिनियम 1991 से बाधित है। इस संपत्ति को गजट द्वारा केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है जो आज भी अपने उसी स्वरूप में है।
अपने जवाब में उन्होंने यह भी कहा है कि जामा मस्जिद प्राचीन स्मारक व पुरातत्त्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम के अनुसार एक संरक्षित स्मारक है, जिसके स्वरूप को अधिनियम के अनुसार बदला नहीं जा सकता है। पुरातत्व विभाग ने अपने जवाब में यह भी लिखा है कि केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित करने के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था। उस समय किसी के द्वारा इसका विरोध नहीं किया गया और अब इसके स्वरूप को बदलने की अवधि समाप्त हो चुकी है।
भगवान श्री नीलकंठ महादेव आदि की ओर से उनके अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू, विवेक रेंडर, अरविंद परमार, अर्पित श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। पुरातत्व विभाग ने वादी के अधिवक्ता वेद प्रकाश साहू को अपना जवाब प्राप्त कराया। मंगलवार को अधिवक्ताओं की हड़ताल होने का कारण सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट ने मामले में सुनवाई को 30 जुलाई की तारीख तय की है।