Budaun News: भाजपा सांसदों ने स्कूलों को गोद लेकर बेसहारा छोड़ा… अब पहचानते तक नहीं

प्राथमिक स्कूल बराही।
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बदायूं जिले में परिषदीय विद्यालयों की दशा और शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों ने स्कूल गोद लिए थे, लेकिन गोद लेने के बाद इनकी तरफ मुड़कर नहीं देखा। एक-दो जनप्रतिनिधि जरूर इन स्कूलों में छुटपुट काम कराकर औपचारिकताएं निभाते नजर आए, लेकिन अन्य ने इन्हें बेसहारा छोड़ दिया। यही वजह है कि इन स्कूलों की दशा नहीं सुधर सकी। सबसे उपेक्षित तो स्कूलों को दोनों सांसदों ने किया। उन्होंने तो दो टूक कह भी दिया कि उन्होंने स्कूल गोद लिए हैं, इसकी जानकारी ही नहीं है।
प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं हैं। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 2022 में जनप्रतिनिधियों ने परिषदीय स्कूलों को गोद लिया था। इन्हें गोद लेने का मकसद था कि जनप्रतिनिधि अपनी देखरेख में स्कूल में जरूरत के मुताबिक काम कराएंगे ताकि वहां बच्चों को बेहतर सुविधाएं और पढ़ाई का माहौल मिल सके। ये स्कूल कॉन्वेंट स्कूलों से मुकाबला कर सके।
मुख्यमंत्री के आह्वान के बाद जनप्रतिनिधियों ने बढि़या-बढि़या स्कूलों को चुन लिया, ताकि यहां पर अगर काम करना पड़े तो बेहद कम से काम चल जाए, लेकिन स्कूलों को चुनने के बाद अधिकांश जनप्रतिनिधियों ने उनकी तरफ पलटकर नहीं देखा। कुछ स्कूलों में एक-दो जनप्रतिनिधि केवल औपचारिकताएं पूरी करके आ गए। बदायूं की सांसद संघमित्रा मौर्य और आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने तो इस बात से ही इन्कार कर दिया कि उन्होंने कोई स्कूल भी गोद लिया है।