Budaun News: अपनों की करतूतों से आंखें फेरीं, सीएमओ ने गंवा दी कुर्सी
बदायूं। पोस्टमार्टम के दौरान महिला के शव से आंखें चुराने के मामले में शुरू से ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लापरवाह बने रहे। दो चिकित्सकों के जेल जाने के बाद भी उनको निलंबित नहीं किया गया तो इस संबंध में विभागीय जांच के आदेश भी नहीं दिए गए। मामला शासन तक पहुंचा तो मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार वार्ष्णेय को निलंबित कर दिया गया।
महिला पूजा के शव से आंखें चुराने का मामला बीती 11 दिसंबर को सामने आया। महिला के पिता की शिकायत पर डीएम मनोज कुमार के निर्देश पर दोबारा कराए गए पोस्टमार्टम और पुलिस की प्रारंभिक जांच से स्पष्ट हो गया कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने रिपोर्ट में जमकर लापरवाही की। इसके बाद आरोपी चिकित्सकों को जेल भेज दिया गया। इस मामले में भले ही डीएम मनोज कुमार की ओर से दो कमेटियांं गठित कर दी गईं लेकिन सीएमओ स्तर से इस मामले में घोर लापरवाही बरती गई। और तो और विभागीय जांच के भी निर्देश भी नहीं दिए गए। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी तो मौके पर पहुंचे लेकिन सीएमओ एक बार भी पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंचे और न ही उन्होंने मोर्चरी को देखने की जहमत उठाई। यह भी पता करने की कोशिश नहीं की कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किस स्तर पर चिकित्सकों ने लापरवाही बरती। यही नहीं दोनों चिकित्सकों के जेल जाने के बावजूद उनको निलंबित नहीं किया गया।
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आज सौंप सकते हैं जांच रिपोर्ट
महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में डीएम मनोज कुमार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों का बोर्ड भी गठित किया है। उन्हें जांच पूरी करने के लिए दो दिन का समय दिया गया था। वैसे तो दो दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी जांच पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि चिकित्सक शनिवार को जांच रिपोर्ट सौंप देंगे।
डॉक्टरों के बोर्ड ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। शनिवार को रिपोर्ट आ सकती है। फिलहाल सीएमओ को निलंबित करने का कोई आदेश उनके पास नहीं आया है। आदेश आने पर ही कुछ बताया जा सकता है। जेल भेजे गए डॉक्टरों को निलंबित नहीं किए जाने के संबंध में कुछ नहीं कह सकते।
– मनोज कुमार, डीएम
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सीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार वार्ष्णेय को निलंबित करने के संबंध में अभी शासन से कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश आने के बाद महिला के शव से आंखें चुराने के मामले में जांच की जाएगी। आरोपी डॉक्टरों पर भी कार्रवाई शासन स्तर से होनी है।
– डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी, एडी हेल्थ

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