Budaun News: अब पहचान छिपाकर नहीं रह सकेंगे अपराधी
तुषार चौहान
बदायूं। एसएसपी ऑफिस परिसर में एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो) के तहत नफिस (नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर आइडेंटिटी सिस्टम) सेल गठित किया गया है। यहां अपराधियों के फिंगर प्रिंट लिए जा रहे हैं। रिकार्ड के तैयार होने के बाद पहचान छिपाकर दूसरे राज्य या शहर में रहने वाले बदमाश पुलिस को नजर से बच नहीं पाएंगे। संदेह होने पर पुलिस उनके फिगर प्रिंट से हो कुंडली निकाल लेगी।
आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल अब बदायूं पुलिस भी कर रही है। इस सुविधा से अब अपराधी पहचान नहीं छुपा पाएगा। उसकी पूरी कुंडली पुलिस कुछ ही समय में देख सकेगी। नफिस कार्यालय प्रभारी इंस्पेक्टर अफताब ने बताया कि कोर्ट से पहले बदमाशों का रिकॉर्ड कार्यालय में फीड कराया जा रहा है। उनके फिगर प्रिंट आदि स्कैन हो रहे हैं। इससे अपराधी देश के किसी भी कोने में पहचान छिपाकर नहीं रह पाएगा। (संवाद)
18 राज्यों की पुलिस को एक-दूसरे से जोड़ा
एसएसपी कार्यालय परिसर में नफिस का कार्यालय बनाया गया है। इसके जरिये 18 राज्यों की पुलिस को एक-दूसरे से सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के जरिये जोड़ा गया है। सभी राज्यों के अपराधियों के रिकॉर्ड एकत्रित हो रहे हैं। कितने अपराधी सक्रिय है, उनके नाम- पते के अलावा फिंगर प्रिंट, फोटो, आंखों की फोटो आदि अपलोड हो रहे हैं। यहां इंस्पेक्टर और आरक्षी तैनात किए गए हैं।
3350 अपराधियों की कुंडली तैयार
इस कार्य के लिए पूरी ट्रेनिंग दी गई थी। उसके बाद कार्य किया जा रहा है। एनसीआरबी की ओर से लखनऊ में ट्रेनिंग वर्कशाॅप का आयोजन किया गया था। बकौल प्रभारी, अपराधी का डाटा फीड करने में करीब 15 मिनट लगते हैं। अपराधियों की यूनिक आईडी तैयार की जा रही है। नफिस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 3350 अपराधियों की डाटा फीडिंग हो चुकी है। इसमें 3097 लोग थानों से लाए गए हैं। 253 लोग सजायाफ्ता हैं। कार्यालय में एक इंस्पेक्टर के अलावा एक हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल तैनात हैं।
पहले मैनुअल होता था परीक्षण, एफिस के बाद आया नफिस
कुछ साल पहले पुलिस व फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ पेपर पर अपराधियों के फिंगर प्रिंट लेते थे। जिनका फिंगर प्रिंट रखे गए अपराधियों के फिगर प्रिंट से मिलान किया जाता था। इसके बाद प्रदेश में एफिस (ऑटोमेटिड फ्रिंगर प्रिंट सिस्टम) नामक सॉफ्टवेयर आया। इसमें पूरा ब्योरा फीड किया गया। अपराधियों के फिंगर प्रिंट का डाटा एकत्रित किया जाता था, लेकिन फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं हो पता था। इसलिए, यह कारगर साबित नहीं हो पाया। अब देश के सभी राज्यों के अपराधियों का नफिस के जरिये पूरा डाटा होगा।
नाफिस कार्यालय में अपराधियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। यहां अपराधियों को डाटा तैयार हो रहा है। जेल जाने वाले हर आरोपी को कोर्ट से पहले नाफिस कार्यालय ले जाते हैं और पूरी प्रकिया से रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। – डाॅ. ओपी सिंह, एसएसपी