Budaun News: खेती हुई बर्बाद, मजदूरी बनी मजबूरी…कई लोगों ने छोड़ा गांव

जरतौली में भरे पानी से होकर गुजरते ग्रामीण। संवाद
दातागंज के चार गांवों की करीब छह हजार बीघा जमीन पर बोई गई 95 फीसदी फसल तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
दातांगज। रामगंगा का जलस्तर बढ़ जाने के कारण दातागंज क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर गया था, साथ ही खेत भी पानी से लबालब हो गए थे। इससे किसानों की छह हजार बीघा जमीन पर बोई गई 95 फीसदी फसल भी तबाह हो गई तो तकरीबन एक दर्जन गांवों का संपर्क भी जिला मुख्यालय से कट गया था। अब धीरे-धीरे गांवों के हालात सामान्य होने लगे हैं, बावजूद इसके खेती बर्बाद होने के बाद कई लोगों ने घर चलाने के लिए मजदूरी की तलाश में गांव छोड़ दिया है तो कई छोड़ने की तैयारी में हैं।
तहसील क्षेत्र से होकर निकल रही रामगंगा का जलस्तर बढ़ जाने के कारण हर्रामपुर, नवादा, पट्टी बिजा, लालपुर खादर, कुडरा मजरा, जरतौली, सिमरिया, मौसमपुर समेत दो दर्जन गांवों का संपर्क पूरी तरह से जिला मुख्यालय से टूट गया था। सिमरिया, मौसमपुर, सकतपुर में तो रामगंगा का पानी अंदर तक घुस गया था। इनमें मौसमपुर से दातागंज का रास्ता तो खुल गया लेकिन जरतौली, सिमरिया, सकतपुर के रास्ते पर अब भी पानी भरा है।
हालांकि जहां पानी कम हुआ है, वहां कीचड़ लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है। इससे जरतौली के करीब 150, सकतपुर के करीब 170, मौसमपुर के 225 और सिमरिया के डेढ़ सौ से ज्यादा परिवार प्रभावित हैं। इन गांवों की करीब छह हजार बीघा जमीन पर बोई गई करीब 90 से 95 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है।
इस कारण जरतौली के रामबहादुर, श्यामबहादुर, अवनेश, सुनील, तेजपाल, राजीव, नन्हें, शीलेंद्र समेत करीब 20 लोगों के परिवार बाहर मजदूरी करने चले गए हैं। गांव वालों का कहना है कि गांव के करीब 70 प्रतिशत लोगों ने बाहर मजदूरी करने के लिए जाने का मन बना लिया है, क्योंकि परिवार तो पालना ही है।
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पशु ज्यादा, गांव में रहना मजबूरी
गांव के तमाम लोग ऐसे भी हैं, जिन पर अधिक संख्या में पशु हैं। पशुपालन करके ही यह अपना गुजारा करते हैं। ऐसे लोगों का यहां रुकना मजबूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि एक दो पशुओं वाले लोग अपने पशुओं को आस पड़ोस के लोगों के हवाले करके मजदूरी करने जा रहे हैं। जिन पर ज्यादा पशु हैं, वे जैसे-तैसे अब भी गांव में रहकर ही गुजारा कर रहे हैँ।
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कटान में चली गई जमीन, अब हाथ खाली
रामगंगा में बाढ़ के कारण जरतौली की करीब तीन सौ बीघा तथा मौसमपुर में करीब सौ बीघा जमीन कटान में चली गई। रामगंगा का जलस्तर घटने के बाद हुए कटान के कारण यह रामगंगा के दूसरी ओर पहुंच गई है। ऐसे में किसानों के पास अपनी जमीन तक नहीं बची। इस कारण उनके लिए अब परिवार चलाने के लिए मजदूरी का ही सहारा बची है।