Budaun News: अपनों को बचाने में जुटा स्वास्थ्य महकमा
बदायूं। सीएमओ कार्यालय में उन्हीं के सामने जहरीला पदार्थ खाने वाले निजी अस्पताल संचालक का हालत में सुधार होने पर उसे बरेली के हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है। परिजन उसे घर ले आए हैं। इधर, स्वास्थ्य विभाग अपने अधिकारी और कर्मचारियों को बचाने में जुट गया है। मंगलवार शाम सीएमओ की ओर से जारी किए प्रेसनोट में अस्पताल संचालक को ही दोषी ठहराया गया है।
सोमवार को राजश्री हॉस्पिटल के संचालक गौरव पटेल ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीएमओ कार्यालय में जहरीला पदार्थ खा लिया था। इस पर उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से उसे बरेली रेफर कर दिया गया। हालांकि परिजन अब उसे घर ले गया है।
सीएमओ कार्यालय की सफाई
सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय की ओर से जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि नौ मार्च को राजश्री हॉस्पिटल में शिल्पी पत्नी बिट्टू की मौत हो गई थी। दूसरे दिन एसीएमओ और नायब तहसीलदार वहां पहुंचे थे, महिला कर्मचारी कागजात नहीं दिखा पाई, इस पर अस्पताल को सील कर दिया था। 25 जुलाई को अस्पताल ताला खुलवाकर संचालक के हवाले कर दिया गया था, लेकिन बाद में जांच कराई गई तो कोई भी कर्मचारी प्रशिक्षित नहीं मिला, न कोई डॉक्टर तैनात था। रजिस्ट्रेशन में जिन डॉ. मोहम्मद नाजिर का नाम लिखा था, उन्होंने धोखे में रजिस्ट्रेशन पर नाम लिखने का आरोप लगाया था। इससे संचालक पर एफआईआर दर्ज कराई थी।
कैसे पहुंचे डॉक्टर के दस्तावेज संचालक के पास
जिस डॉक्टर ने धोखे से नाम लिखाने का आरोप लगाया था, उनके दस्तावेज संचालक के पास कैसे पहुंचे और सीएमओ कार्यालय ने अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कैसे कर दिया। जिला अस्पताल के डॉक्टर से बातचीत के वायरल हुए ऑडियो को भी स्वास्थ्य विभाग ने सिरे से नकार दिया। सीएमओ ने बताया कि ऑडियो हमारे पास नहीं आई है। अब हमारे नाम से कोई पैसे लेता है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं।



