Budaun News: हत्या में दो सगे भाइयों सहित सात को आजीवन कारावास
बदायूं। मुकदमेबाजी की रंजिश में 15 साल पहले हुई हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश शिवकुमारी ने सात अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सभी पर 6.15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
थाना रजपुरा (संभल) के गांव न्यौरा निवासी लालू ने 12 जून 2009 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अपने बड़े भाई सुरेश और गांव के सोमवीर व राजेश के साथ परिवार की एक महिला को दवा दिलाने निरंजन की मारुति वैन से बबराला जा रहे थे। वैन रास्ते में ब्रेकर पर वैन धीमी हुई तभी पीछे से बाइकोंं पर आए गांव के ही कुंवरपाल पुत्र भोला सिंह, पप्पू पुत्र महेश, भूरे व रजनीश पुत्रगण गंगाधर, ओमपाल पुत्र मक्खन, बिल्लू पुत्र राम सिंह, पप्पू पुत्र भूरे और सुरेश पुत्र भगवान दास ने रंजिश के चलते तमंचों से ताबड़तोड़ फायर कर दिए। इसमें सुरेश और चालक निरंजन को गोली लगी। घायल सुरेश की इलाज के दौरान अलीगढ़ में मृत्यु हो गई। पुलिस ने सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश ने एडीजीसी ओमपाल कश्यप और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों को सुना। न्यायाधीश ने हत्या में नामजद कुंवरपाल, भूरे, रजनेश, ओमपाल, बिल्लू, पप्पू और सुरेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने पप्पू को हत्या के मामले में बरी कर दिया है।
एक मुजरिम को इसी कोर्ट से पहले भी हो चुकी है सजा
एक दूसरे मामले में ओमपाल को तत्कालीन फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश सारिका गोयल ने भी 25 नवंबर 2021 को गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। इस दूसरे मामले में ओमपाल ने वादी लखपत सिंह पुत्र यादराम निवासी न्यौरा थाना रजपुरा की गाड़ी रुकवाकर मारपीट कर तमंचे से फायर कर गंभीर रूप से लखपत को घायल कर दिया था। दरअसल, ओमपाल ने लखपत से किसी मुकदमे में फैसला करने का दबाव बनाया था। लखपत के मना करने पर मुजरिम ओमपाल ने अपने साथियों के साथ हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।