Budaun News: छुट्टा पशुओं को पकड़ने में खानापूर्ति, गोशाला से ज्यादा सड़कों पर घूम रहे

अलापुर थाने के सामने सड़क पर बैठे आवारा पशु। संवाद
बदायूं। प्रदेश सरकार के आदेश पर भले ही छुट्टा पशुओं से राहत दिलाने के लिए जिले में जगह-जगह गोशाओं का निर्माण कराया गया है लेकिन इसकी हकीकत कुछ और है। इस समय हालात यह हैं कि गोशालाओं से ज्यादा छुट्टा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। इनसे न सिर्फ फसलें ही बर्बाद हो रहीं हैं बल्कि यह लोगों की जान भी ले रहे हैं। इसके बावजूद पशुपालन विभाग इनको गंभीरता से नहीं ले रहा है।
जिले में 237 गोशालाएं हैं और उनमें करीब 39000 पशु सरंक्षित हैं। यह आंकडा पिछले वर्ष तक का है। पिछले वर्ष विभाग की ओर से जिले में छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया गया था, तब यह आंकड़े जारी किए गए थे। इसके अलावा अभियान चलाकर गोशालाओं का भी निर्माण कराया गया था। तब कहीं गोशालाओं की संख्या बढ़कर 237 तक पहुंची थी। यह अभियान कुछ समय तक चला था।
अधिकारियों ने भी खूब ध्यान दिया था लेकिन कुछ समय के बाद छुट्टा पशुओं को ही भूल गए। जो पशु शेष रह गए, वो आज भी खुलेआम सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं। अब तो उनकी संख्या भी बढ़ गई है। जहां देखो छुट्टा पशु ही पशु दिखाई दे रहे हैं। यह केवल बदायूं शहर के हालात नहीं हैं।
यह पूरे जिले का हाल है। चाहे कुंवरगांव कस्बा हो, या बिसौली, वजीरगंज, सहसवान, दातागंज समेत सभी कस्बों का हाल है। पिछले पांच साल में आवारा पशुओं के हमले में करीब 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और इससे ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब तो और ज्यादा हादसे हो रहे हैं। हालांकि एक नवंबर से पशु पालन विभाग ने 60 दिन का छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया है लेकिन इस अभियान को अभी तक रफ्तार नहीं मिली है। अब तक नाममात्र के पशुओं को पकड़ा गया है। यह लापरवाही लगातार लोगों के लिए जानलेवा बनी हुई है।
विभाग के सामने सवाल, पकड़ें तो कहां रखें छुट्टा पशु
– विभागीय अधिकारियों के मुताबिक भले ही दोबारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया गया है लेकिन उन्हें पकड़कर कहां रखा जाए। यह सबसे बड़ा सवाल है। हालांकि डीएम ने प्रत्येक ब्लॉक क्षेत्र में और गोशालाएं बनाने के निर्देश दिए हैं। 15 ब्लॉक में करीब 50 से ज्यादा गोशालाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसकी समय सीमा पांच दिसंबर तक दी गई है लेकिन तब तक विभाग के अभियान के 30 दिन वैसे ही गुजर जाएंगें। ऐसे में कितने पशु पकड़े जाएंगें। यह तो समय ही बताएगा।
ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान
– यह छुट्टा पशु सबसे ज्यादा किसानों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं। लगातार उनकी फसलें बर्बाद कर रहे हैं। अब तो किसान अपने खेतों की तारकशी कराते-कराते थक गए हैं। कुछ इलाकों में तो यह हाल है कि तारकशी कराने से दूसरे खेतों में जाने के रास्ते तक बंद हो गए हैं। ऐसे में न तो किसान सुरक्षित है और न ही उनकी फसलें सुरक्षित हैं। इन छुट्टा पशुओं वजह से छोटे-छोटे बच्चे तक खेत पर जाने से डर रहे हैं।
देववाणी चौराहा बना छुट्टा पशुओं का अड्डा
बिल्सी। नगर की गलियों में छुट्टा पशुओं का आतंक बरकरार है। कई बार आक्रामक होकर आपस में ही लड़ जाते हैं। तब स्थानीय लोगों को और ज्यादा मुसीबत हो जाती है। रात के समय इन पशुओं का झुंड नगर के बाईपास रोड पर देववाणी चौराहे पर लगता है। फिर यहां से लोगों को निकलना और ज्यादा मुश्किल हो जाता है। क्षेत्र में कुछ नई गोशालाओं निर्माण कराया जा रहा है। इनको पकड़ने का अभियान नाम मात्र के लिए चल रहा है। इससे क्षेत्र में मुसीबत बढ़ती जा रही है।
– जिले में एक नवंबर से पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू हुआ है लेकिन बीच में दिवाली का त्योहार आ गया, जिससे ज्यादा पशु नहीं पकड़े गए हैं। त्योहार बाद पशुओं को पकड़ा जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 50 से ज्यादा गोशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही इन पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जाएगा। – डॉ. केके त्यागी, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी

अलापुर थाने के सामने सड़क पर बैठे आवारा पशु। संवाद

अलापुर थाने के सामने सड़क पर बैठे आवारा पशु। संवाद



