बदायूं

Budaun News: बीमारियों को दावत दे रही ग्राम पंचायतों की अनदेखी

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लार्वानाशक टेमोफॉस का नियमित छिड़काव न कराने से पैदा हो रहा लार्वा

मलेरिया विभाग का दावा- सभी को उपलब्ध कराया जा रही दवा

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। गांवों में सैकड़ों लोग मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। उझानी के सकरी जंगल और अलापुर के बिलहरी में तीन-तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। बावजूद इसके कई ग्राम पंचायतों में लार्वानाशक छिड़काव नहीं किया गया है। हालांकि मलेरिया विभाग ने ग्राम पंचायतों को लार्वानाशक टेमोफॉस उपलब्ध कराए जाने का दावा किया है।

मच्छरजनित बीमारियों के लिहाल से जिला अत्यंत संवेदनशील है। समरेर, सालारपुर, जगत आदि कुछ ब्लॉक तो अतिसंवेदनशील की श्रेणी में आते हैं। साल 2010 में मलेरिया के 20 हजार से ज्यादा केस सामने आए थे। इसमें करीब 18 हजार पीवी के तथा दो हजार से ज्यादा पीएफ मलेरिया के थे। डेंगू के भी 42 केस मिले थे। हालांकि यह सरकारी आंकड़े थे, वास्तविकता में यह आंकड़ा कई गुना ज्यादा था। इस साल कई लोगों की मौत भी बुखार से हुई थी। हालांकि उसके बाद साल दर साल मरीजों का आंकड़ा तो घटता गया, लेकिन लापरवाही कम नहीं हुई। दरअसल मलेरिया विभाग द्वारा सभी ग्राम पंचायतों को बीडीओ या एडीओ के माध्यम से लार्वानाशक टेमोफॉस का वितरण किया जाता है। ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों को इसका छिड़काव कराना होता है लेकिन अधिकतर ग्राम प्रधानों ने इसमें रुचि नहीं ली। इस कारण पानी भरे स्थानों या गंदगी में लार्वा पनपता रहता है जो धीरे-धीरे मच्छर बन जाते हैं और बीमारियों के वाहक बनते हैँ।

ऐसे बनता है मच्छर

– मच्छर का अंडा फूटने में करीब एक सप्ताह का समय लगता है। उसके बाद उसमें से लार्वा निकलता है। ये लार्वा चार दिन से दो सप्ताह तक रह सकता है। चार से पांच दिन में लार्वा प्यूपा में बदल जाता है और दो दिन में प्यूपा वयस्क मच्छर बन जाता है। एक बार मनुष्य को काटने के बाद मादा मच्छर 48 से 72 घंटे के अंदर अंडे देती है। एक बार में मादा एनोफिलीज मच्छर 150 से 200 अंडे तक दे सकती है। यही मादा मच्छर मलेरिया का कारण होती है और यही मनुष्यों को काटती है।


पिछले सालों में मिले मरीज

वर्ष-पीवीपीएफडेंगूकुल

201918310-2029– 42 -20391

202010085-1902– 7 -11994

2021-1506159 471 2136

2022-1279-94– 579-1892


इस साल भी पांच सौ से पार निकल रहा आंकड़ा

इस बार भी मलेरिया के मरीजों का आंकड़ा अब तक पांच सौ के पार जा चुका है। इसमें पीवी मलेरिया के मरीज ज्यादा हैं। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत के अनुसार, गांवाें में लार्वानाशक का छिड़काव कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों और ब्लाकों की है। मलेरिया विभाग द्वारा सभी बीडीओ, एडीओ और एमओआईसी के माध्यम से गांवों को टेमोफॉस का वितरण किया जाता है। हालांकि कुछ जागरूक ग्राम प्रधान स्वयं आकर भी दवा ले जाते हैं, लेकिन अधिकतर ने छिड़काव नहीं कराया। इसके अलावा डीबीसी (डेली ब्रीडिंग चेकर्स) को एंटी लार्वा टेबलेट भी उपलब्ध कराई जाती है। इस बार भी डीबीसी की 18 टीमें इस पर काम कर रही हैँ। इसके अलावा 28 टीमें गांव-गांव जाकर सर्वे का काम भी कर रही हैं। इन टीमों द्वारा लोगों को जागरूक कर मलेरिया रोधी उपाय करने के बारे में बताया जा रहा है।


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