Budaun News: मुकदमेबाजी में फंसी नई जेल, चार साल से फैसले का इंतजार

जिला जेल की बंजर पड़ी भूमि। संवाद
बदायूं। नई जेल के लिए करीब नौ साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद कई साल तो विभाग जमीन तलाशने में ही लगा रहा। बहेड़ी के पास जेल के लिए जमीन मिली तो प्रशासन ने किसानों से बैनामे कराने शुरू कर दिए, लेकिन इसी बीच दो किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर कर दिया। चार साल से मामला कोर्ट में लंबित है। इससे जेल का निर्माण अटक गया है।
जिला जेल में इस समय 529 की क्षमता के विपरीत 1050 बंदी-कैदी हैं। क्षमता से ज्यादा बंदी और कैदी होने की वजह से नई जेल के निर्माण को मंजूरी मिली तो शहर से सटे गांव बहेड़ी के पास जमीन चिह्नित की गई। किसानों की जमीनों के बैनामे की प्रक्रिया शुरू की गई तो 14 किसानों ने जमीन को लेकर विरोध दर्ज कराया।
इसके बाद प्रशासन ने लगातार पैरवी करते हुए 12 मामलों का निस्तारण करा दिया, लेकिन दो किसानों के कोर्ट चले जाने से पेच फंस गया। अब प्रशासन की ओर से इन मामलों का निस्तारण कराने की पहल भी नहीं की जा रही है, क्योंकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। शासन इसका संज्ञान लेकर कोर्ट में पैरवी करे, तभी जेल का निर्माण हो सकेगा।
– नई जेल में बंदी और कैदियों को रखने की क्षमता ज्यादा होगी। फिलहाल अभी जिला कारागार में क्षमता से दो गुना ज्यादा बंदी और कैदी हैं। हालांकि पहले से बंदी कम हुए हैं। पहले तो तीन गुना बंदी थे। भविष्य में जो भी फैसला होगा, उसके हिसाब से ही कार्य किया जाएगा। – डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक

जिला जेल की बंजर पड़ी भूमि। संवाद



