Budaun News: आयोडीन की कमी से एक तिहाई आबादी पर घेंघा का खतरा
बदायूं। शरीर में आयोडीन की कमी को आयोडीन अल्पता कहा जाता है। इससे घेंघा और रतौंधी जैसे खतरनाक रोग होते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, जिले में करीब एक तिहाई लोगों पर आयोडीन की कमी से बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। हर साल 21 अक्तूबर को आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है।
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. नितिन सिंह के मुताबिक, आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो मानव वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। आयोडीन शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है। शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी सहायक है।
शरीर में आयोडीन का संतुलन बनाए रखने का कार्य थाइरोक्सिन हार्मोन करता है जो मनुष्य की थायराइड ग्रंथि से स्रवित होता है। डॉ. नितिन के अनुसार, आयोडीन की कमी बच्चे, महिला, बुजुर्ग नौजवान किसी में भी हो सकती है। कमी होने पर डाॅक्टर से सलाह लेकर दवाओं व पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना चाहिए। अनुमान के अनुसार जिले में एक तिहाई लोग इसकी कमी से होने वाली बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
आयोडीन की कमी के लक्षण
– चेहरे और गले के अगले हिस्से में थाइराइड ग्रंथि में सूजन।
– मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बाधा
– वजन बढ़ना, रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ना और ठंड बर्दाश्त न होना
आयोडीन की कमी से होने वाले नुकसान और रोकथाम
– आयोडीन की कमी से गर्भवती महिलाओं का गर्भपात भी हो जाता है तो वहीं नवज़ात शिशुओं का वज़न कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि नुकसान देखने को मिलते हैं। एक शिशु में आयोडीन की कमी से उसमें बौद्धिक और शारीरिक विकास में समस्याएं जैसे मस्तिष्क का धीमा चलना, शरीर का कम विकसित होना, बौनापन, देर से यौवन आना, सुनने और बोलने की समस्याएं तथा समझ में कमी आदि हो सकती हैं। इसकी रोकथाम के लिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को थायराइड हार्मोन दिया जाता है।


