Budaun News: सथरा कांड के वादी को धमकाने के मामले में पुलिस ने लगाई अंतिम रिपोर्ट
बदायूं। जिले के चर्चित सथराकांड के वादी राजेश गुप्ता को धमकाने के मामले में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है। रिपोर्ट 20 दिन पहले ही 17 अक्तूबर को थाना सिविल लाइंस में दर्ज कराई गई थी। राजेश गुप्ता का आरोप है कि विवेचक एसआई बलवीर सिंह ने बिना जांच पड़ताल किए ही एफआर लगा दी है, जबकि आरोपी लगातार उन्हें धमकी दे रहे हैं।
अक्तूबर 2022 में उसहैत थाना क्षेत्र के गांव सथरा निवासी सपा नेता राकेश गुप्ता, उनकी मां शांति देवी और पत्नी शारदा गुप्ता की दिनदहाड़े घर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला काफी चर्चित रहा था। गनीमत ये रही कि उस वक्त सपा नेता राकेश के भाई राजेश गुप्ता घर पर नहीं थे। राजेश ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं।
उन्होंने तिहरे हत्याकांड में गांव के रवींद्र दीक्षित और उसके दो बेटों समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। हालांकि बाद में पुलिस ने कुछ और लोगों को भी नामजद किया था। तब से सभी आरोपी जेल में हैं लेकिन रवींद्र दीक्षित का बेटा अर्चित जमानत पर बाहर आ गया है। 17 अक्तूबर को राजेश ने अर्चित दीक्षित, कमले नगला निवासी सचिन, डहरपुर निवासी शेखर उर्फ तनु और सथरा निवासी भानुप्रकाश उर्फ भानु के अलावा छह अज्ञात लोगों के खिलाफ धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी।
राजेश गुप्ता का कहना है कि नौ अक्तूबर को वह हत्याकांड के मामले में गवाही देने न्यायालय गए थे। शाम करीब चार बजे जैसे ही वह कोर्ट से निकले तो आरोपियों ने उन्हें घेरकर जान से मारने की धमकी। इससे वह काफी डर गए थे। उनकी तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली थी लेकिन 20 दिन के अंदर ही उसमें एफआर लगा दी गई थी। अब राजेश गुप्ता ने एसएसपी से दोबारा जांच कराने की मांग की है। इंस्पेक्टर गौरव बिश्नोई ने बताया कि उन्होंने दोबारा जांच कराने का प्रार्थना पत्र दिया है। वह इस मामले को दिखवाएंगे।
राजेश की सुरक्षा में लगे हैं दो पुलिस कर्मी
राजेश गुप्ता ने बताया कि उनके भाई, भाभी और मां की हत्या के बाद से दो पुलिस कर्मियों को उनकी सुरक्षा में लगाया गया है। विवेचक कह रहे थे कि उन्हें गनर मिले हैं। इससे आरोप की पुष्टि नहीं होती। उन्होंने कहा कि पुलिस ने रुपये लेकर एफआर लगाई है। तमाम भीड़ और सुरक्षा कर्मियों के बीच कैसे हत्या हो जाती है। पुलिस पहले इसका जवाब दे।