Budaun News: कहीं बारिश, कहीं धूप….बदला-बदला रहा मौसम का मिजाज

रविवार की सुबह आसमान में छाय बादल। संवाद
आज भी बादल छाए रहने का अनुमान, हो सकती है बारिश
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। रविवार को मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया। शहर में कुछ स्थानों और ग्रामीण इलाकों में बारिश हुई तो बाकी जगह बादल छाए रहे। बीच-बीच में धूप भी निकली। आने वाले दिनों में पूरे सप्ताह ही मिलाजुला मौसम रहने के आसार जताए जा रहे हैं। इस दौरान बादल छाने तथा हल्की बारिश की संभावना है।
शनिवार शाम को करीब आधा घंटा झमाझम बारिश हुई। इसके बाद मौसम ने करवट ली। कई दिनों से पड़ रही गर्मी से राहत मिली, हालांकि उमस बढ़ गई। रविवार को मौसम का मिजाज बदला-बदला रहा। शहर में एक-दो स्थानों पर तेज बारिश हुई तो कहीं सूखा रहा। बीच-बीच में हल्की धूप भी निकली।
वहीं बिल्सी, बिसौली, सहसवान समेत कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हुई। सोमवार को भी बादल छाए रहने तो हल्की बौछारें पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम के अनुसार, आने वाले पूरे सप्ताह में बादल छाए रहेंगे। गरज के साथ कभी हल्की तो कभी तेज बारिश हो सकती है। पूरे सप्ताह मौसम एक सा रहने के कारण तापमान में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा।
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बारिश से मिर्च को नुकसान… उड़द भी चपेट में आया
तेज हवा चलने पर गिर सकती हैं धान की बालियां पर बाजरे पर प्रभाव नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं / उझानी। पिछले कुछ दिनों में हुई झमाझम बारिश ने खरीफ की फसलों पर प्रभाव डाला है। मिर्च और शिमला मिर्च पर तो रोपाई के दौरान ही नुकसान का साया पड़ गया है। उड़द पानी में डूब गया है तो अब धान पर भूरा फुदका कीट का खतरा बढ़ गया है। हालांकि बाजरे की फसल पर बारिश ने कोई प्रभाव नहीं डाला है।
बारिश से बैंगन और कद्दू के अलावा शिमला मिर्च की फसल को नुकसान हुआ है। फिलहाल धान को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन खेतों में बारिश का पानी भरा रहने से धान की बालियों को फुदका कीट नुकसान पहुंचा सकता है तो तेज हवा चलने पर बालियां भी गिर सकती हैं। इसके विपरीत रोपाई के दौरान मिर्च की फसल का करीब 30 फीसदी रकबा तबाह हो चुका है।
उड़द की फसल के संबंध में किसान नेत्रपाल ने बताया कि जमीनी सतह से निचाई वाले खेतों में बारिश के दौरान पांच-छह दिनों तक पानी भरा रहा। इससे पौधे काफी हद तक सड़ गए हैं, जो बचे हैं वे पीले पड़ गए हैं। बता दें कि इस बार सितंबर में पिछले साल के मुकाबले अधिक बारिश हुई है।
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धान में यदि बालिया आ गईं हैं तो तेज हवा से वे गिर सकती हैं। बाजरे की फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ हैं। सब्जी की फसलें चूंकि कयारियों में लगाई जाती हैं, इसलिए यदि उनमें पानी भर जाता है तो गुणवत्ता खराब हो सकती है। यूरिया का ज्यादा प्रयोग करने पर भी फसलें कमजोर हो जाती हैं, जिससे वे हल्की बारिश या हवा में ही गिरने लगती हैं। ऐसे में किसानों को यूरिया का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।
– डीके सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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बारिश की वजह से मिर्च और शिमला मिर्च के अलावा अगेती गोभी और उड़द की फसल का नुकसान हुआ है। खेतों में ज्यादा दिनों तक बारिश का पानी भरा रहना फसलों के लिए घातक है। ऐसे में जरूरी है कि बारिश के पानी के निकास की व्यवस्था तुरंत की जाए।
– डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

रविवार की सुबह आसमान में छाय बादल। संवाद