बदायूं

Budaun News: बरात में जाने से रोका तो छात्र ने फंदा लगाकर जान दी

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गांव से जा रही बरात में जाने की जिद कर रहा था किशोर

जिद करने पर पिता ने जड़ दिए थप्पड़, परिजनों ने गुपचुप किया अंतिम संस्कार

संवाद न्यूज एजेंसी

बिल्सी। कोतवाली क्षेत्र के गांव मिर्जापुर शोहरा में मंगलवार की शाम बरात में जाने की जिद कर रहे छात्र को पिता ने डांट दिया। बताते हैं कि ज्यादा जिद करने पर पिता ने उसे थप्पड़ भी जड़ दिए, जिससे छात्र ने दूसरी मंजिल पर बने कमरे में जाकर फंदा लगाकर जान दे दी। परिजनों ने पुलिस को बगैर सूचना दिए रात में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

गांव निवासी एक 16 वर्षीय छात्र नगर के एक इंटर काॅलेज में कक्षा 12 में पढ़ रहा था। मंगलवार रात गांव के एक युवक की बरात जाने वाली थी, जिसमें जाने के लिए छात्र पिता से जिद करने लगा। ज्यादा जिद करने पर पिता ने उसे डांट दिया और एक-दो थप्पड़ भी जड़ दिए। इसके बाद पिता बिल्सी नगर के लिए आ गए।

बताते हैं कि उनके पीछे गुस्साए छात्र ने चुपचाप जाकर घर पर दूसरी मंजिल पर बने एक कमरे जाकर अपने को बंद कर लिया और उसके बाद फंदा लगा लिया। शाम को उसके पिता वापस गांव पहुंचे तो उन्होने अपने पुत्र को घर में न दिखने पर पूछताछ की। इसके बाद परिवार के लोगों ने उसको तलाश करना शुरू किया। इसी दौरान घर के लोगों ने दूसरी मंजिल पर बने कमरे में जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। यहां उनका पुत्र फंदे से लटका हुआ था। उन्होंने उसे नीचे उतारा।

पिता बोले- आभास भी होता तो कभी न डांटता बेटे को

छात्र चार भाइयों में सबसे छोटा था। गांव के लोगों का कहना है कि मृतक का पिता अब कह रहा है कि उसे पता होता कि उसका बेटा ऐसा कदम उठाएगा तो वह अपने कभी भी उसे नही डांटता। बेटे की मौत से घरवाले बेहद सदमे में है और बेटे की मौत के लिए खुद को कोस रहे हैं। इधर, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले की जानकारी पुलिस को नहीं दी गई है।

किशोर उम्र जीवन की सबसे संवेदनशील उम्र होती है। इस उम्र में बच्चे सही- गलत का अहसास नहीं कर पाते। वे जो सोचते हैं, उन्हें वही सही लगता है और वे अपने आसपास एक आभासी दुनिया बना लेते हैं। इसी दुनिया को वे सच्चाई समझते हैं। ऐसे में माता-पिता को इस उम्र के बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना चाहिए ताकि वे उनसे सभी बातें शेयर कर सकें। इस उम्र में बच्चों को डांटना या मारना तो बिल्कुल ही नहीं चाहिए, बल्कि प्यार से समझाने का प्रयास करना चाहिए। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा कि किशोर को पिता की डांट और मार बुरी लगी होगी, जिसके बाद उसने ऐसा कदम उठा लिया।

-डॉ. नरवीर यादव, मानसिक रोग विशेषज्ञ


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