Budaun News: पक्के घाट बनें तभी रुकेगा मौतों का सिलसिला
उझानी। कछला घाट पर पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व ही नहीं, बल्कि प्रत्येक रविवार को श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आती है। अव्यवस्थित घाट और जलस्तर में गहराई वाले स्थानों पर पुख्ता संकेतक का अभाव श्रद्धालुओं की जान पर भारी पड़ रहा है। पक्के घाट बन जाने से श्रद्धालुओं की जान पर जोखिम काफी कम हो जाएगा।
कछला घाट पर बदायूं, बरेली जिले के अलावा गंगा पार से कांसगज, हाथरस, आगरा, मथुरा, एटा, फिरोजाबाद और राजस्थान व मध्यप्रदेश से भी श्रद्धालु आते है। राजस्थान में कछला घाट के अलावा सोरों (कासगंज) के तीर्थस्थल का खास महत्व है। दशहरा के अलावा पूर्णिमा वाले दिन तो कछला घाट श्रद्धालुओं की संख्या काफी नजर आती है।
कहा जाता है कि गंगाघाट पर श्रद्धालुओं के अनुरूप व्यवस्था नहीं की जाती। नगर पंचायत के कुछेक कर्मचारी और चौकी के पुलिस कर्मी ही घाट पर नजर आते हैं। गोताखोर आसपास इलाके के हैं। उन्हीं के भरोसे हादसों के दौरान कुछ हद तक श्रद्धालुओं को बचाने में सफलता प्राप्त कर ली जाती है।
गंगाघाट निवासी प्रेमपाल ने बताया कि पक्के घाट के निर्माण और पीएसी के गोताखोरों की तैनाती के लिए कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। दो साल पहले घाट पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल और प्रदेेश सरकार के मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी समेत सांसद और कई विधायक पहुंचे, तब भी मांग की गई थी। हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता।
घाट के सुंदरीकरण के लिए तो हर साल ही दावों की सौगात मिल जाती है। श्रद्धालुओं में सोरों के रामभजन का कहना है कि प्रदेश सरकार को कछला को तीर्थ क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए। इसके बाद घाट का कायाकल्प का धन की दिककत आड़े ही आएगी।



