Budaun News: एनसीसी कैडेट्स को बताई मोटे अनाज की उपयोगिता

दास कॉलेज में सेमिनार में मौजूद एनसीसी कैडेट्स। स्रोत स्वंय
बदायूं। एसके कॉलेज और एनएमएसएन दास कॉलेज में रविवार को मोटे अनाज और उसकी उपयोगिता विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें एनसीसी कैडेट्स को मोटे अनाज की उपयोगिता समझाई गई।
एसके कॉलेज में एनसीसी अधिकारी कैप्टन विजय कुमार गौतम ने बताया कि मिलेट्स, जिन्हें मोटा अनाज एवं श्री अन्न भी कहा जाता है, भारत की पारंपरिक खेती का हिस्सा रहे हैं। बाजरा, ज्वार, कोदौं, रागी, कुटकी आदि मिलेट्स हैं, जो कि कम पानी में उगने वाली फसलें हैं। यह जल संरक्षण में मदद भी करती हैं। इसके अतिरिक्त उनके तने एवं पत्तों का उपयोग जानवरों के चारे के रूप में हो जाता है।
प्रवक्ता डॉ. बृजेंद्र कुमार ने कैडेट्स को गेहूं में उपस्थित ग्लूटिन की हानियों के बारे में बताया। कहा कि मिलेट्स के प्रयोग से ग्लूटिन से उत्पन्न होने वाली मोटापा तथा अस्थमा जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। कैडेट अनुभव कुमार, पवन यादव, हर्षित यादव, विकास पाल ने भी अपने विचार रखे। प्रधानाचार्य संदीप भारती ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एनसीसी कैडेट्स को पुरस्कृत किया। इधर, दास कॉलेज में 21 यूपी बटालियन की सेमिनार में कैप्टन डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. बीएन शुक्ल आदि ने बाजरा और अन्य मोटे अनाज की पौष्टिकता पर बल दिया। उन्होंने बाजरा की मांग बढ़ाने की भारतीय पहल का समर्थन किया।