Budaun News: जन औषधि केंद्र चलाएंगी समितियां, दो को मिली मंजूरी

नेकपुर में स्थित जन औषधि केंद्र। संवाद
बदायूं। जिले में सहकारी समितियों द्वारा अब जनऔषधि केंद्र संचालित किए जाएंगे। प्रशासन के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सहकारी संघ ने शासन को पांच समितियों के नाम भेजे थे, वहां से दो समितियों को स्वीकृति मिल गई है। अब विभाग ने आगे की प्रक्रिया के लिए लाइसेंस लेने के लिए आवेदन किया है।
शासन की ओर से समितियाें की आर्थिक दशा सुधारने और समितियों पर लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। सहकारिता से समृद्धि की थीम पर हो रहे काम के तहत अब सरकारी समितियों को बहुउद्देशीय समिति वी पैक्स नाम दिया गया है। समितियां अभी तक कृषि संबंधी कार्य कर रही थीं पर अब ये खाद बीज की बिक्री तक ही सीमित नहीं रहेंगी।
इनके द्वारा ग्रामीणों को सस्ती दर पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साधन सहकारी समितियों पर जन औषधि केंद्र खोले जाने के लिए सहकारिता विभाग ने बिनावर, दहगवां, कटिया अलीगंज, जहांगीराबाद और म्याऊं समिति का चयन कर शासन को नाम भेजे थे, जिनमें से शासन ने दो समितियों को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत जहांगीराबाद और कटिया अलीगंज में जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे।
शासन से परमिशन मिलने के बाद में विभाग ने अगली प्रक्रिया के तहत लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। जैसे ही लाइसेंस मिलने की कार्रवाई पूरी होती है, उसके बाद में दवाइयां मंगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
समय से दवाएं नहीं मिलने के कारण बंद हो गए थे केंद्र : जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती दवाएं दिलाने की योजना जिले में फेल हो गई। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में खोले गए केंद्र दवा के अभाव में धीरे-धीरे बंद हो गए। हालांकि प्राइवेट स्तर पर एक केंद्र शहर में संचालित है लेकिन यहां पर भी दवाओं का अकाल रहता है। जिस फर्म के द्वारा इन्हें संचालित किया जाना था, उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी जन औषधि केंद्र खोले जाने की तैयारी की थी, लेकिन इसी बीच महिला अस्पताल उसके बाद में जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र दवाएं समय पर नहीं मिलने के कारण बंद हो गए। ऐसे में दोनों केंद्र करीब तीन साल से बंद पड़े हैं। नेकपुर में एक जन औषधि केंद्र संचालित है लेकिन वहां पर भी सारी दवाएं नहीं मिलतीं।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक महेंद्र सिंह ने बताया कि जिले से पांच समितियों के नाम चयन कर शासन को भेजे गए थे। इनमें से दो पर शासन ने अपनी सहमति जता दी है। इसके तहत लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद है कि बाकी तीनों समितियों को भी जल्द शासन स्तर से सहमति मिल जाएगी।
प्रभारी जिला औषधि निरीक्षक बबिता रानी ने बताया कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को कोई भी व्यक्ति खोल सकता है। उसके लिए लाइसेंस पाने के लिए कुछ पात्रता है जिसमें पर्याप्त जगह होना, संबंधित व्यक्ति के पास डिप्लोमा या डिग्री होना शामिल हैं। सरकारी अस्पताल में जन औषधि केंद्र क्यों बंद हो गए थे। इसके बारे में जानकारी नहीं है।