Budaun News: लै सिर बाहु चले नाराचा, सिर भुज हीन रुंड महि नाचा

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद
बदायूं। विजयादशमी का त्योहार जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। गांधी ग्राउंड में लंका दहन के बाद प्रभु श्रीराम ने दशानन की नाभि में तीर मारकर उसका अंत कर दिया। इसके बाद रावण का पुतला धू-धूकर जल उठा। इससे पहले मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान शानदार आतिशबाजी से आसमान भी सतरंगी हो उठा।
शहर के गांधी ग्राउंड में चल रही रामलीला में मंगलवार को भगवान श्रीराम और रावण के बीच घनघोर युद्ध हुआ। वानरों और राक्षसों के बीच चले रोमांचकारी युद्ध का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। इसके बाद मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। विभीषण के बताने पर प्रभु श्रीराम ने रावण की नाभि में तीर मारकर उसका अंत कर दिया। इसके बाद रावण का पुतला दहन हुआ। इससे पहले हनुमान ने रावण की लंका को जलाकर राख कर दिया। पुतला दहन देखने के लिए मेले में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
दोपहर बाद से ही दूर दराज से लोग गांधी ग्राउंड में आना शुरू हो गए और अपनी जगह सुरक्षित कर ली। गांधी ग्राउंड के आसपास सड़कों के किनारे ट्रैक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों से आए लोगों ने कब्जा जमा लिया। इस दौरान लोगों ने आतिशबाजी का भी लुत्फ उठाया। इस मौके पर सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता, डीएम मनोज कुमार, एसएसपी ओपी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट रामजी लाल समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
रावण की अस्थियां (पुतले में लगीं बांस की खपच्चियां) लूटने की मची होड़
रावण का पुतले दहन होने के बाद लोग उसकी अस्थियां (बांस की खपच्ची) लेने के लिए दौड़ पड़े। हालांकि इस दौरान कुछ लोग गिर भी पड़े। लोगों का मानना है कि रावण की अस्थियों के घर में रखने से सुख, समृद्धि आती है। किसी भी प्रकार की बाधा घर में प्रवेश नहीं करती है। इसी अफरातफरी में कुछ लोगों की जेब भी कट गई। मूसाझाग के अरविंद ने बताया कि वह भी रावण की अस्थियां लेने झुके तभी किसी ने उनका पर्स उड़ा दिया। पर्स में आठ सौ रुपये थे। इसी प्रकार पुठी के राजेंद्र की जेब भी किसी ने साफ कर दी। उनकी जेब में सात सौ रुपये थे। बाद में रिश्तेदार से किराया लेकर उन्हें गांव लौटना पड़ा।
युवक झुलसा तो बंद कराई आतिशबाजी
रावण और मेघनाद के पुतलों के दहन के बाद सिविल लाइंस क्षेत्र के बरेली रोड नवादा निवासी दिलशाद आतिशबाजी करते समय झुलस गए। हाथों के साथ ही उनका चेहरा भी झुलस गया। युवक के झुलसने के बाद मेले में अफरातफरी का माहौल हो गया। मेले में मौजूद पुलिस बल ने झुलसे युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद आतिशबाजी बंद करा दी गई।
रावण का पुतला जला, जय श्रीराम के नारे गूंजे
कादरचौक। कई दिनों से चला आ रहा राम-रावण दल का युद्ध मंगलवार को अंतिम चरण में था। युद्ध क्षेत्र में रावण और राम अपने-अपने रथों पर एक दूसरे के सम्मुख थे। राम ने रावण पर अनेक बाणों से प्रहार किया, लेकिन रावण का अंत नहीं हुआ। तब विभीषण ने भगवान राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है। भगवान राम ने अग्निबाण से रावण की नाभि का अमृत सुखा दिया। राम के तरकश से निकले तीर रावण का सिर काटकर उसे ले जाकर देवी मंदोदरी के सामने रख देते हैं। चारों ओर भगवान राम की जयकार होने लगती है। आकाश से देवता फूल बरसाते हैं और पूरी धरती रावण के आतंक से मुक्त हो जाती है। इस अवसर पर सीओ शक्ति सिंह, एसओ उदयवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
पुतला दहन के बाद बांटे सवा दो क्विंटल चने
कादरचौक। कस्बा में लगभग डेढ़ सौ साल की पुरानी रामलीला में पुतला दहन के बाद रात के समय चने का प्रसाद वितरित किया जाता है। मान्यता है की ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए यह परंपरा डेढ़ सौ वर्ष पूर्व से चली आ रही है। पसेई गांव के लोगाें ने सोमवार को चंदा एकत्र कर बाजार से चना लिए। जिसके बाद में वह मंगलवार को कादरचौक में स्थित रामलीला स्थल पर पहुंचे। वहां पर उन्होंने वहां पर करीब सवा दो क्विंटल चना का वितरण रावण दहन के बाद किया। ग्रामीणों का मानना है कि पसेई गांव से राधाकांत मंदिर का पुराना संबंध है। रामलीला के समय डेढ़ सौ वर्ष पूर्व स्थित महंत ने इस परंपरा को चालू कराया था। पसेई गांव के उनके अनुयायियों ने ब्रह्म हत्या के रूप में रावण वध को माना और इससे मुक्ति के लिए चने के प्रसाद का वितरण किया। तब से आज तक यह परंपरा अनवरत चल रही है।

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद

रावण का अस्ति-पंजर लेने को टूट पड़ी भीड़। संवाद