आई फ्लू : 20 गुना बिका आईड्रॉप, दोगुना एलर्जी की दवा और चश्मे
बरेली। बदलता मौसम बैक्टीरिया और वायरस के पनपने की वजह बन रहा है। वर्षों बाद जिले में आई फ्लू का प्रकोप बढ़ने से आईड्रॉप, काले चश्मे और एलर्जी की दवाओं की बिक्री में उछाल आया है।
जुलाई की शुरुआत से ही कंजक्टिवाइटिस के केस बढ़ने लगे थे। इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को डॉक्टर पर्चे पर आईड्रॉप लिख रहे थे। आईड्रॉप की कमी होने से मेडिकल स्टोर से खरीदारी हो रही थी। मामला सुर्खियों में आया तो जिम्मेदारों ने मेडिकल काॅर्पोरेशन से आईड्रॉप की आपूर्ति न होने की बात कही। फिर लोकल परचेज से आईड्रॉप खरीदे गए। सरकारी खरीद और लोगों की ओर से खरीदारी बढ़ने से दवा कारोबार में भी उछाल दर्ज हुआ। कंजक्टिवाइटिस अब आईफ्लू बन चुका है। केस अभी बढ़ रहे हैं। आईड्रॉप, एलर्जी की दवा, चश्मे की खरीदारी जारी रहेगी।
करीब 50 गुना तक बिक चुके हैं आईड्रॉप
बरेली केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी के मुताबिक पहली बार जुलाई में आईड्रॉप की बिक्री 50 गुना ज्यादा रही। हाल के वर्षों में जुलाई में अधिकतम सवा लाख रुपये ही बिक्री होती थी, जो इस साल 55 लाख रुपये तक पहुंच गई। संक्रमण से बचाव के लिए एलर्जी की दवा की भी मांग रही। जुलाई में ही करीब दो गुना (25 लाख रुपये) कारोबार हुआ है। स्टॉक भी दोबारा मंगाना पड़ा।
15 लाख काले चश्मे बिके
आईफ्लू की चपेट में आने पर परिजन और सहयोगियों को संक्रमण से बचाने का कारगर उपाय काले चश्मे पहनना है। डॉक्टरों के सुझाव के चलते काले शेड के यूज एंड थ्रो चश्मे की भी बिक्री खूब रही। ज्यादातर 50 से सौ रुपये तक के चश्मे बिके। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक करीब 15 लाख चश्मे बिक चुके हैं।
बरतें सावधानी.. प्रकोप अभी थमा नहीं
तीन सौ बेड अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय के मुताबिक ओपीडी में हर दिन 150 से ज्यादा आंख के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। लोगों को सर्द-गर्म से बचाव, आंखों को बगैर हाथ धोए न छूने, दिन में तीन से चार बार ठंडे पानी से आंखों को धोने, खुजली या दर्द होने के साथ आंख लाल होने पर बगैर डॉक्टर के परामर्श से दवा या ड्रॉप का प्रयोग न करने का सुझाव दिया है।



