बरेली
जिंदा है तभी मनाते हैं हिंदी दिवस
वर्तमान परिवेश में हमारे समाज पर अंग्रेजी हावी होती जा रही है. ऐसे में हिंदी प्रेमियों के अलग-अलग मत हैं. कुछ का मानना है कि हमारी राष्ट्रभाषा केवर्चस्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, वहीं कुछ मानते हैं कि हिंदी का अस्तित्व ऐसा है कि उस पर कभी कोई संकट आ ही नहीं सकता.



