उम्र निर्धारण केस: अब्दुल्ला आजम के मामले में दोनों पक्षों ने कोर्ट में दाखिल किए दस्तावेज, आधे घंटे हुई बहस

अब्दुल्ला आजम खान।
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अब्दुल्ला आजम के उम्र निर्धारण मामले में अदालत में शनिवार को सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने रामपुर न्यायालय के आजम खां, अब्दुल्ला आजम और फातिमा को मिली सजा के आदेश को सबूत के तौर पर दाखिल किया। वहीं बचाव पक्ष ने रामपुर न्यायालय में दाखिल सिविल सूट को आधार बनाते हुए दीवानी के मुकदमे की नकल अदालत में दाखिल की।
दोनों पक्षों की ओर से आधे घंटे से अधिक अब्दुल्ला आजम की उम्र को लेकर बहस की गई। जिसके बाद दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब्दुल्ला आजम के उम्र निर्धारण का मामला जनपद न्यायाधीश डाॅ. अजय कुमार की अदालत में विचाराधीन है।
जिसमें अब्दुल्ला आजम के वकीलों द्वारा अब्दुल्ला आजम की उम्र संबंधित कागजात अदालत में पेश किए जा चुके हैं। जिन पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में जवाब पेश किया। जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव अग्रवाल और मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि शनिवार को अबदुल्ला आजम की ओर से उनके वकीलों ने एक अतिरिक्त प्रार्थना पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
जिसमें वर्ष 1990 की जन्मतिथि को बताते हुए कहा कि सीबीएसई को पार्टी बनाते हुए एक दीवानी का मुकदमा रामपुर की अदालत में दायर किया गया है। यह मुकदमा में अभी विचाराधीन है। इसके अलावा लखनऊ के एक निजी अस्पताल का रिकार्ड भी अब्दुल्ला आजम की उम्र से संबंधित अदालत में पेश किया।
जिस पर अभियोजन पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए अदालत में कहा कि अब्दुल्ला आजम की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र के साथ कोई भी ऐसा प्रमाण पत्र दाखिल नहीं किया गया है जो किसी भी स्कूल से प्रमाणित हो। अदालत में जो कागजात दाखिल किए गए हैं वो वर्तमान स्थिति में अदालत में दाखिल करने योग्य नहीं हैं।
अभियोजन पक्ष द्वारा रामपुर न्यायालय से प्राप्त वह आदेश भी जनपद न्यायाधीश की अदालत में दाखिल किया गया, जिसमें दो जन्म तिथियों के संबंध में आजम खान, फातिमा बेगम और खुद अब्दुल्ला आजम सजा भुगत रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली आदेश सुरक्षित रख लिया है।
छजलैट प्रकरण में सजा के खिलाफ दाखिल की थी अर्जी
छजलैट में 2 जनवरी 2008 को सपा के पूर्व मंत्री और रामपुर के पूर्व विधायक आजम खां की कार को चेकिंग के लिए रोका गया था। जिसके बाद विवाद बढ़ गया था और आसपास के जनपदों से सपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे थे। जिन पर आरोप लगा था कि इन्होंने आम जनता को उकसा कर सड़क जाम करते हुए बवाल किया।
सरकारी कार्य मे बाधा उत्पन्न करने का भी आरोप लगाया था। इस मामले में रामपुर के पूर्व विधायक आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम समेत अन्य आरोपी बनाए गए थे। इस मामले में 13 फरवरी 2023 को आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई थी।
इस मामले में अब्दुल्ला आजम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा था कि जब छजलैट थाने में केस दर्ज किया गया था, तब वह नाबालिग थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही जिला जज की अदालत में इस मामले में सुनवाई चल रही है।