लंपी वायरस : सात ब्लॉकों में टीकाकरण शुरू, अलर्ट जारी
शाहजहांपुर। पशुओं पर लंपी वायरस का खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए कांट, जलालाबाद, मिर्जापुर, सिंधौली, निगोही, खुदागंज और भावलखेड़ा में पशुओं का टीकाकरण शुरू कराया गया है, ताकी पशुओं की जान बचाई जा सके।
लंपी वायरस पशुओं के लिए जानलेवा है। इस बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से कदम उठाए गए हैं। इसके लिए पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है, जिसकी मॉनीटरिंग स्वयं सीवीओ डॉ. मनोज कुमार कर रहे हैं। साल 2022 में पंजाब के पशुओं में लंपी स्किन वायरस की बीमारी देखने को मिली थी। इस बीमारी का फिलहाल जिले में कोई मामला सामने नहीं आया है। बावजूद इसके पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को अपने पशुओं पर मच्छरदानी के प्रयोग की सलाह दी है। मुख्यालय से निर्देश जारी हुए हैं कि पशुपालन विभाग द्वारा इस पर नजर रखी जाए।
सीवीओ डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि पूर्वांचल के कुछ जिलों में लंपी बीमारी फैली हुई है। कई पशु इस वायरस की चपेट में आ गए हैं। वायरस पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। यह बीमारी लखीमपुर खीरी जिले में भी देखने को मिल रही हैं।
इस तरह से फैलती है बीमारी
यह बीमारी हवा से नहीं फैलती, बल्कि डास मक्खी के लंपी से ग्रसित पशु का खून चूसने के बाद दूसरे की पीठ पर बैठ जाने से फैलती है। इस बीमारी में सबसे पहले पशु की गर्दन पर धब्बेनुमा गांठें जा जाती हैं। इसके बाद धीरे-धीरे यह पशु के पूरे शरीर पर फैल जाती है। इसके बाद पशु चारा-खाना छोड़ देता है। धीरे-धीरे उसके शरीर में कमजोरी आने लगती है। यहां तक की पशु दूध देना भी बंद कर देता है।
इस तरह से करें बचाव
लंपी वायरस से अपने पशुओं को बचाने के लिए मच्छरदानी जरूर लगाकर रखें। बीमारी से ग्रसित पशुओं व उनसे संबंधित सामान को बाकियाें से अलग रखना चाहिए। संक्रमित पशुओं को इधर-उधर न जाने दें। पशुओं पर लगने वाली मक्खी, मच्छर, चिचड़ों की रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास करें।
सीमावर्ती क्षेत्रों को किया जा रहा कवर
सीवीओ ने बताया कि पूर्वांचल के जिलों में फैल रहे लंपी वायरस को देखते हुए सबसे पहले सीमावर्ती क्षेत्रों के सात ब्लॉकों को कवर किया जा रहा है। 37 टीमें टीकाकरण अभियान में लगी हुई हैं। इससे पहले गोशालाओं में रहने वाले पशुओं को 88,600 डोज लग चुकी है। अब एक लाख 50 हजार डोज आई हैं, जिसका टीकाकरण हो रहा है। जिले में इस समय दो लाख 49 हजार कुल गोवंशीय पशु हैं। बोले कि उनका प्रयास है एक भी पशु को लंपी वायरस जकड़ न पाए। छुट्टा पशुओं को भी टीका लगाया जा रहा है।