पीलीभीत

माधोटांडा मार्ग : पूरी सड़क ही उधड़ी पड़ी… कहां, कैसे लगेंगे पैबंद

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Madhotanda Road: The entire road is torn up, where and how will it be patched?

माघौटांडा जाने वाली सड़क पर हुए गडडे ।संवाद

पीलीभीत। माधोटांडा-पीलीभीत रोड पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। 30 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की हालत ये है कि यहां सड़क बची ही नहीं है। पूरा मार्ग ही उधड़ा पड़ा है। अब तो इससे निकलना भी दूभर हो गया है। पीडब्ल्यूडी भी मान रहा है कि यहां अब नई सड़क ही पड़नी चाहिए। गड्ढे भरने से काम चलने वाला नहीं है। सात माह पहले लोक निर्माण विभाग ने निर्माण का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली। अलबत्ता एक बार फिर गड्ढे भरने के लिए सात लाख रुपये का बजट जारी कर दिया गया है।

पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग के दिन नहीं बहुर पा रहे हैं। 30 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर अब गहरे गड्ढों के अलावा कुछ नहीं बचा है। बीच सड़क पर गहरे गड्ढे जानलेवा होते जा रहे हैं। जनवरी में राज्यपाल के दौरे के दौरान इन गड्ढों को भरा गया था। इसके बाद मार्च में फिर गड्ढे भरने का काम किया गया। अब तो पूरी सड़क ही उधड़ गई है।

सड़क का यह हाल देखकर पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब सात माह पहले शासन को नई सड़क बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक यह मंजूर नहीं हो सका है। अब जब मुख्यमंत्री ने दिवाली से पूर्व सड़कों के गड्ढे भरने का आदेश जारी किया है तो एक बार फिर माधोटांडा मार्ग के गड्ढे भरने की कवायद शुरू हो गई है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को कहना है कि सात लाख रुपये खर्च कर गड्ढे भरे जाएंगे। पूरे जिले में सड़कों के गड्ढे भरने के लिए 70 लाख का बजट दिया गया है।

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चूका और गोमती जाने वाला मुख्य मार्ग

बरेली और अन्य शहरों के अलावा उत्तराखंड से चूका जाने वाले सैलानियों के लिए यही एकमात्र सीधी सड़क है। इससे सैलानी चूका के अलावा अन्य स्थानों पर जाते हैं। मौजूदा समय में सड़क गड्ढों के कारण इतनी बदहाल हो गई है कि कार को 40-50 की स्पीड में भी नहीं चला सकते हैं। सबसे अधिक समस्या रात के समय होती है। रात में गड्ढे दिखाई न देने से हादसे की आशंका बनी रहती है।

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करीब पांच हजार वाहन रोजाना गुजरते हैं इस मार्ग से

पीलीभीत-असम रोड पर टोल प्लाजा बन जाने के कारण इस सड़क पर वाहनों का आवागमन और ज्यादा बढ़ गया है। बाइफरकेशन और चूका जाने वाले सैलानियों के अलावा क्षेत्र के करीब 30 गांवों के लोग भी पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग का प्रयोग करते हैं। गांव से मुख्यालय आने के लिए एकमात्र यही मार्ग है। चीनी मिल चलने पर गन्ने के सबसे अधिक इसी सड़क से होकर गुजरते हैं। वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण ही सड़क पर गड्ढे हो रहे हैं।

वर्जन 30 किमी के माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग को लेकर शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। यह मंजूर नहीं हो सका है। अब गड्ढे भरने के लिए बजट आया है। इसी से काम करवाया जाएगा। – उदय नरायन, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी


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