मुसलमान यादे इलाही से दिलों को हमेशा मुनव्वर रखें : कादरी


दरगाह ए क़ादरी में तकरीर देते बगदाद के सज्जादानशी। स्रोत-आयोजक
बदायूं। बानी खानकाह कादरिया कुतुब जमा हजरत शाह ऐनुल हक अब्दुल मजीद कादरी बदायूंनी के 182वेंं सालाना उर्स के दूसरे दिन देश-विदेश से जायरीन जुटे। शेख अब्दुल गनी मोहम्मद अतीफ मियां कादरी की जेरे निगरानी में दरगाह आलिया कादरिया में अकीदत व एहतराम से उर्स का आयोजन हुआ।
उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार को फज्र की नमाज के बाद कुरआन की मजलिस हुई। सुबह नौ बजे नात-ओ-मनाकिब की महफिल सजी। इसका सिलसिला नमाज-ए-जुमा तक जारी रहा। रवायत के मुताबिक तिलावत के बाद आला हजरत ताजुल फहुलशाह अब्दुल कादिर कादरी बदायूंनी कुद्स सरह के दीवान मनकबत से हर महफिल का आगाज होता है। इस महफिल का आगाज भी दीवान मनकबत से हुआ। इसके बाद मोहम्मद अज्जाम मियां कादरी ने कलाम पेश कर शुरुआत की।
देश के अलग-अलग शहरों से आए शोअरा और नातख्वां ने बेहतरीन कलाम पेश किए। आखिर में हुजूर साहिब सज्जादा ने फरमाया कि जिक्र इलाही सबसे बड़ी दौलत है, जिक्र इलाही के बहुत से वसायल हैं। मुसलमान यादे इलाही से अपने दिलों को हमेशा मुनव्वर रखें। आस्ताना गौसिया बगदाद से तशरीफ लाए मेहमाने खुसूसी शहजादा-ए-गौसुल आजम शेख पीर सैयद अफीफउद्दीन जीलानी ने दरगाह-ए-कादरी पर जुमे का खुत्बा इरशाद फरमाया।

दरगाह ए क़ादरी में तकरीर देते बगदाद के सज्जादानशी। स्रोत-आयोजक