पीलीभीत

Pilibhit News: पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां न मिलने से 82 हजार किसान परेशान

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82 thousand farmers upset due to not getting sugarcane slips of plant species

बीसलपुर के खेत में तैयार पौंध प्रजाति का गन्ना । संवाद

बीसलपुर। विभागीय उच्चाधिकारियों की अनदेखी के चलते किसानों को पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां नहीं मिल पा रहीं हैं। इससे समिति क्षेत्र के 82 हजार किसान परेशान हैं।

सहकारी गन्ना विकास समिति के अभिलेखों के अनुसार समिति क्षेत्र में कुल 82 हजार गन्ना उत्पादक हैं। इन किसानों के पास पौध और पेड़ी समेत दोनों प्रजातियों का गन्ना है। चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होते ही किसानों को पेड़ी प्रजाति के गन्ने की पर्चियां मिलनी शुरू हो गईं थीं। उस समय किसानों के खेतों में पौध प्रजाति के गन्ने की फसल तैयार नहीं हो पाई थी। अब सभी किसानों के खेतों में पौध प्रजाति के गन्ने की फसल तैयार खड़ी है।

नियमानुसार पौध प्रजाति के गन्ने की फसल तैयार होते ही किसानों को गन्ने की पर्चियां मिलनी शुरू हो जानी चाहिए थीं, लेकिन विभागीय शिथिलता के चलते अभी किसानों को पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां मिलनी शुरू नहीं हो पाईं हैं। किसान इस सिलसिले में संबंधित चीनी मिलों, गन्ना विकास परिषद और सहकारी गन्ना विकास समिति के पिछले लगभग एक पखवाड़े से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।

किसान इन कार्यालयों में जाते हैं और घंटों भटकने के बाद मायूस लौट जाते हैं। सुनवाई न होने से किसानों में संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी है। विभागीय हीलाहवाली के चलते किसानों को कब तक पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां मिलनी शुरू हो पाएंगी, कुछ कहा नहीं जा सकता है। (संवाद)

समिति से जुड़े हैं तीन जिलों के गन्ना किसान

सहकारी गन्ना विकास समिति से पीलीभीत के अलावा समीपवर्ती शाहजहांपुर और बरेली जिले के कई गांवों के काफी किसान जुड़े हैं। सर्वाधिक किसान पीलीभीत जिले के ही हैं। इन किसानों की गन्ने की खेती से संबंधित सारी कार्यवाही इसी समिति के माध्यम से होती है।

15 जनवरी से जारी हो सकती हैं पर्चियां

सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव आरपी कुशवाह ने बताया कि समिति क्षेत्र के किसानों का पेड़ी प्रजाति का अधिकांश गन्ना खत्म हो चुका है। इसकी सूचना विभागीय उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है। ऐसे में इन किसानों को 15 जनवरी से पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां मिलनी शुरू हो सकती हैं। पर्चियां लखनऊ स्थित गन्ना विभाग के प्रदेश कार्यालय से जारी होती हैं।


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