Pilibhit News: फर्जी नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर मरीजों का आंकड़ा बढ़ा रहे एंबुलेंसकर्मी

मेडिकल कॉलेज में खड़ी एंबूलेस । फाइल फोटो
पीलीभीत। गंभीर मरीजों को लाने-ले जाने के लिए नि:शुल्क एंबुलेंस सेवाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि समय रहते मरीजों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई जा सके। जिले में इस सुविधा की आड़ में खेल हो रहा है।
कुछ एंबुलेंसकर्मी मरीजों का फर्जी नाम, पता और मोबाइल नंबर चढ़ाकर आंकड़ा बढ़ाने में जुटे हैं, ताकि कंपनी को फायदा हो सके। मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने एंबुलेंस कर्मियों का यह फर्जीवाडा पकड़ा था। इसकी उन्होंने शिकायत भी की थी, लेकिन उस एंबुलेंस कर्मी को हटाने की बात कहकर पूरे मामले को दबा दिया गया। यही वजह है कि यह खेल अब तक नहीं रुक सका है।
एंबुलेंस कर्मियों की घपलेबाजी का मामला चार माह पूर्व जुलाई में पकड़ में आया था। मेडिकल कॉलेज में तैनात एक डॉक्टर ने चार जुलाई की सुबह करीब सात बजे एक मरीज को लखनऊ राम मनोहर लाेहिया मेडिकल कालेज रेफर किया था। मरीज के परिजनों ने एंबुलेंस पर बात की तो सभी बुक होने की बात सामने आई। इसके बाद एएलएस कंट्रोल पर बात की तो वह भी व्यस्त होना बताया गया।
संबंधित डॉक्टर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पूरी घटना बताई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध करा दी गई। जबकि फोन करने पर सभी एंबुलेंसों का व्यस्त होना बताया गया था, जिनको खाली होने में काफी समय लगने की बात कहीं थी। यह बात संबंधित डॉक्टर को हजम नहीं हुई। इस पर उन्होंने छह जुलाई को एंबुलेंस कर्मियों द्वारा पीसीआर के रजिस्ट्र पर दर्ज मरीजों के नाम, मोबाइल नंबर पर जानकारी की तो वे फर्जी पाए गए।
डॉक्टर ने उनसे बात की तो अधिकांश ने एबुलेंस सेवा न लेने की बात कही। इस पर डॉक्टर ने विभागीय अफसरों से शिकायत की थी, ताकि एंबुलेंस कर्मियों द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लग सके। विभागीय अफसरों का दावा है कि इस मामले में संंबंधित एंबुलेंस कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन क्या कार्रवाई की गई इसको बताने में अफसर परहेज कर रहे हैं।
सरकार देती है एंबुलेंस का खर्चा
गंभीर मरीजों को अस्पताल लाने के लिए जिले में 108, 102 व एएलएस एंबुलेंस सेवा संचालित है। यह एंबुलेंस सेवा एक प्राइवेट कंपनी द्वारा दी जाती है, जिनके कर्मचारी भी कंपनी के ही हैं। मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए जो खर्चा आता है उसका भुगतान सरकार सीधे कंपनी को करती है। ऐसे में जितने अधिक मरीज अस्पताल पहुंचेंगे, उतना ही कंपनी को लाभ होगा। सूत्रों की माने तो कंपनी के दिशा-निर्देश पर ही कर्मचारी इस तरह की गड़बड़ी करते आ रहे हैं।
वर्जन
एंबुलेंस कर्मचारियों द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की जा रही है। एंबुलेंस से जो मरीज लाए जा रहे हैं, सिर्फ उन्हीं का नाम, पता चढ़ाया जा रहा है। लगातार इसकी निगरानी कर रहा हूं। – आरके रौनक, प्रोजेक्ट मैनेजर, 108 एंबुलेंस सेवा
वर्जन
गड़बड़ी करने वाले एंबुलेंस कर्मचारियों के खिलाफ कंपनी को लिखा था। कंपनी द्वारा संबंधित कर्मचारियों हटा दिए जाने की बात बताई गई है।
डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ