Pilibhit News: सीएम के दौरे से जगी गैंडा परियोजना शुरू होने की उम्मीद

महोफ रेंज में बना वाच टावर । संवाद
कलीनगर। टाइगर रिजर्व का अनुकूल वातावरण न सिर्फ बाघों को भा रहा है, बल्कि महोफ और बराही रेंज का काफी भाग गैंडों के लिए भी मुफीद माना जाता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए के उद्देश्य से सपा शासनकाल में मुख्य सचिव ने जंगल का भ्रमण कर गैंडा परियोजना लागू करने के निर्देश दिए थे। सर्वे के बाद असम के काजीरंगा से गैंडे मंगवाने की रणनीति भी बनाई गई थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद योजना फाइलों में कैद होकर रह गई। अब सीएम के प्रस्तावित दौरे से टाइगर रिजर्व को गैंडा परियोजना की सौगात मिलने की उम्मीद है।
पीलीभीत में टाइगर रिजर्व बनाने का शुरुआत में जंगल से सटे गांवों के लोगों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताते हुए विरोध किया था, लेकिन रोजगार समेत बेहतर सुरक्षा का भरोसा दिलाने पर विरोध थम गया था। इसके बाद टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया। इसके बाद पर्यटन को बढ़ावा देने के भी प्रयास शुरू हुए। इसका नतीजा यह रहा कि पीलीभीत के जंगलों में बाघों और तेंदुओं का कुनबा लगातार बढ़ रहा है।
सपा शासनकाल में तत्कालीन मुख्य सचिव ने कई दिन टाइगर रिजर्व में ठहरकर स्थिति को परखने के साथ ही अफसरों के साथ यहां गैंडा पुनर्वास परियोजना शुरू करने पर मंथन किया था। महोफ और बराही रेंज के जंगल का माहौल गैंंडों के लिए उपयुक्त पाया गया था। इसके बाद गैंडा परियोजना को लेकर कार्रवाई तेज की गई। असम के काजीरंगा से गैंडे मंगवाकर परियोजना लागू करने की रणनीति बनाई गई।
वन अफसरों ने जंगल क्षेत्र की मॉनिटरिंग करने के बाद महोफ और बराही रेंज की सीमा में सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में वृक्षों की प्रजातियां समेत वनस्पति का सर्वे किया था। एक ओर जंगल और दूसरी ओर शारदा सागर डैम का क्षेत्र होने के चलते गैंडा परियोजना के लिए यह इलाका बेहतर माना गया था। सर्वे के बाद प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया था, लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रस्ताव फाइलों में कैद कर दिया गया।
अब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के दौरे को लेकर टाइगर रिजर्व को कई उपलब्धियां मिलने की आस जागी है। इसमें पर्यटन के लिहाज से गैंडा परियोजना को भी अहम माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों से लेकर वन अफसरों ने दिलचस्पी दिखाकर इस मामले को सीएम के समक्ष रखा तो सफलता मिल सकती है।
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नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से आ जाते हैं गैंडे
नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से आज भी गैंडे टाइगर रिजर्व में लगातार आते हैं, लेकिन शारदा नदी पार कर इस ओर नहीं आ पाते हैं। बराही और महोफ रेंज में बेहतर ग्रास लैंड के साथ दलदली क्षेत्र भी है जो गैंडों के लिए मुफीद माना जाता है।