Pilibhit News: सीवीओ पहुंचे परशुरामपुर गोआश्रय स्थल, लेकिन सच्चाई पर पड़ा रहा पर्दा
10 गोवंश की मौत का मामला ः हकीकत छिपाने को केयरटेकर को रखा गया दूर
संवाद न्यूज एजेंसी
कलीनगर। माधोटांडा के परशुरामपुर में स्थित गोआश्रय स्थल पर 21 दिन में दस गोवंश की मौत के मामले में बृहस्पतिवार को सीवीओ डाॅ. अरविंद निरीक्षण को पहुंचे लेकिन सच्चाई न उन्होंने देखना चाही और न दिखाई गई।
माधोटांडा के मौजा परशुरामपुर में स्थित गोआश्रय स्थल में दो केयरटेकर काम करते हैं। गोवंश के लिए की जाने वाली व्यवस्था से लेकर यहां आने वाले तक का लेखा-जोखा रखा जाता है लेकिन इन्हीं केयरटेकर को सीवीओ के सामने नहीं लाया गया। सीवीओ ने भी केयर टेकर से बातचीत करने की इच्छा जाहिर नहीं की। सरकारी निरीक्षण में हर बार की तरह इस बार भी व्यवस्थाएं ठीक मिलीं। कुछ सुधार के निर्देश जरूर दिए गए।
बता दें कि 15 जुलाई को गोआश्रय स्थल में गोवंश की संख्या 70 थी जो अब घटकर 60 रह गई है। दस गोवंश की मौत हो चुकी है। परिसर में ही गड्ढा खोदकर शवों को दबा दिया गया। एक माह पूर्व से गोआश्रय स्थल पर हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। 15 दिन पहले निरीक्षण को पहुंचे डीसी मनरेगा की फटकार के बाद डेढ़ एकड़ दायरे में चारे की बुआई की गई थी, जो अभी कटने लायक तक नहीं हुआ।
चोकर की भी नियमित व्यवस्था नहीं है। दो सप्ताह पूर्व निरीक्षण को पहुंचे एसडीएम आशुतोष गुप्ता को भी भूसे में चोकर नहीं मिला था। उन्होंने स्वयं 1200 रुपये देकर एक कट्टा चोकर मंगवाया था। गोवंश की मौत का मामला सुर्खियों में आया तो अफसर मामले को दबाने में जुट गए। निरीक्षण करने पहुंचे अफसरों ने गोआश्रय स्थल में कार्य करने वालों से सच्चाई जानने की कोशिश नहीं की न ही उन्हें सामने आने दिया गया।
माधोटांडा पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. नुरुल हुदा का कहना है कि पांच गो आश्रय स्थल उनके कार्य क्षेत्र में आते हैं। सभी में नियमित निरीक्षण किया जाता है। परशुरामपुर में भी गोवंश की नियमित देखरेख की जा रही है लेकिन गोवंश को खाने के लिए हरा चारा मिलना भी जरूरी है। अफसरों को इस बारे में बताया गया है।