Pilibhit News: सफाई कर्मियों के निलंबन में डीपीआरओ भूले नियम-कायदे
पीलीभीत। गांवों में तैनात सफाई कर्मियों को लापरवाही पर निलंबित करने में जिला पंचायतराज अधिकारी सारे नियम कायदे भूल गए। सीडीओ ने जब इसकी पड़ताल की तो इसका खुलासा हुआ। अब डीपीआरओ को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
गांवोंं में तैनात सफाईकर्मियों के निलंबन और बहाली में भी उ.प्र. सरकारी सेवक अनुशासन नियमावली का पालन किया जाता है। जिले में इन नियमावली को ही ताक पर रख दिया गया था। गांव में सफाई व्यवस्था ठीक न होने और बिना बताए गायब रहने के आरोप में ही सफाई कर्मियोें को निलंबित कर दिया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा ने महज 11 माह के भीतर 21 सफाई कर्मियों को निलंबित कर दिया। बाद में 11 को बहाल भी कर दिया।
इस खेल की जब सीडीओ को भनक लगी तो उन्होंने निलंबित और बहाल किए गए सफाई कर्मियों की पत्रावली को तलब कर लिया था। साथ ही डीपीआरओ से कारणों को पूछा था। पत्रावली को जब देखा गया तो किसी भी कर्मचारी को निलंबित करने के नियमावली का पालन नहीं किया गया था। यही नहीं बहाली के बाद उनको कोई वृहद दंड भी नहीं दिया गया। ऐसे में पूरा मामला शक के दायरे में आ गया। इस लापरवाही पर अब डीपीआरओ को नोटिस जारी कर चेतावनी दी जा रही है।
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निलंबन और बहाली में यह है नियम
उ.प्र. सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली में कई नियम तय किए गए है। इन्हीं नियमों के आधीन रहकर कार्रवाई की जाती है। इसमें निलंबन से पहले कर्मचारी के आरोपों को देखा जाता है कि किस दंड की श्रेणी में है। इसमें कर्मचारी को लघु और वृहद दंड दिया जाता है। निलंबन तभी होता है जब सेवक के आरोप गंभीर हो और दंड की गुंजाइस न हो। डीपीआरओ की ओर से निलंबन के बाद दंड के रूप में प्रतिकूल प्रविष्टि और चेतावनी नोटिस जारी करते हुए बहाली की गई है। ऐसे में कर्मचारियों को दंड नियमावली के तहत नहीं मिल सका।
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पत्रावली को देखने के बाद निलंबन में नियमावली का पालन नहीं किया गया है। ऐसे में लापरवाही को देखते हुए चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। उनके कार्यकाल में 21 को निलंबित किया गया है।- धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी