Pilibhit News: भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक आतंक था आपाताकाल
पीलीभीत। शहर के रामा इंटर कॉलेज में शनिवार दोपहर ‘लोकतंत्र की गिरफ्तारी’ विषय पर विचार गोष्ठी हुई। राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज बरेली के पूर्व प्राचार्य डॉ. योगेश मिश्र ने बताया कि गोष्ठी का आयोजन आपातकाल की पूर्व संध्या पर किया गया है। उन्होंने बताया कि अब न तो सरकार के पास और न ही नागरिकों के पास उद्देश्यों को पूरा करने के लिए संसाधनों की कमी है। बस काम करने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे लोग आपातकाल के संघर्ष से अनभिज्ञ हैं। वे आपातकाल के दौरान जेलों में नहीं रहे। उन्हें नहीं पता कि उस दौरान लोकतंत्र सेनानियों को कितनी यातनाएं सहनी पड़ी थीं। लोकतंत्र सेनानी संगठन के अध्यक्ष अशोक शमशा एडवोकेट ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक आतंक का शर्मनाक काला दिन था। उन्होंने कहा की 1974 में कांग्रेस के खिलाफ जन आंदोलन शुरू हुआ, जो व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन था। इंदिरा गांधी सरकार छोड़ना नहीं चाहती थी, इसलिए उन्होंने 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा कर दी। सभी विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया।
उन्होंने कहा कि 18 महीने बाद लोकतंत्र की वापसी हुई और विचारधारा की राजनीति का समापन हो गया। संगठन के मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि सरकार की घोषणा के लंबे समय गुजरने के बावजूद लोकतंत्र सेनानियों के गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं। इस दौरान रवि बजाज, मोहम्मद मियां, राम बहादुर आचार्य, सरयू प्रसाद रस्तोगी, अरविंद सिंह, डॉ. धीरेंद्र सिंह, शालिग्राम आदि मौजूद रहे।