पीलीभीत

Pilibhit News: मेला खत्म, रेलवे की आय के साथ कारोबार भी हुआ मंदा

Connect News 24

पीलीभीत। बारिश के चलते पूर्णागिरि मेला बंद होने का असर सबसे अधिक रेलवे के साथ स्टेशन और आसपास फैले कारोबार पर प़ड़ा है। रेल यात्रियों की संख्या आधी रह गई है। वहीं स्टेशन पर वेंडर अपना किराया तक नहीं निकाल पा रहे हैं। यही हाल स्टेशन के बाहर दुकानों और ऑटो-रिक्शा वालों का है। उनकी आय 50 फीसदी से भी कम हो गई है।

हालांकि सरकार ने इस वर्ष से पूर्णागिरि मेला पूरे साल भर लगाने का निर्णय लिया था लेकिन बारिश के मौसम में यात्रा बंद हो गई है। इसका असर रेलवे जंक्शन पर पड़ा। मेले के दौरान प्रतिदिन सात से आठ हजार यात्री ट्रेन से सफर करते थे। जो जो अब चार से पांच हजार के बीच रह गए हैं। यात्री न होने से प्लेटफार्म पर सन्नाटा पड़ा रहता है। हाल यह है कि त्रिवेणी जैसी ट्रेन में पीलीभीत से टनकपुर तक वमुश्किल 50-100 यात्री होते हैं। जबकि मेले के दौरान इस ट्रेन में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी।

ऑटो वालों से लेकर वेंडर तक परेशान

जंक्शन पर यात्रियों की संख्या में कमी आने से ई रिक्शा वाले भी खासे परेशान हैं। जंक्शन के बाहर करीबन 50-60 ई रिक्शा चालक खड़े रहते हैं। ट्रेन आने पर इन्हें सवारियों की तलाश रहती है। हाल यह है ई-रिक्शा चालकों को सवारियां तक नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं जंक्शन पर ठेला, स्टॉल व कैंटीन चलाने वाले भी परेशन हैं। इनकों रेलवे का किराया देना तक भारी पड़ रहा है।

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किराया तक नहीं निकल रहा कैंटीन का: अवधेश

जंक्शन पर खाने की कैंटीन चलाने वाले अवधेश कश्यप ने बताया कि इन दिनाें यात्रियों की संख्या बेहद कम रह गई है। दिन में 40-50 थाली ही बिक पाती हैं। ऐसे में रेलवे में जमा करने वाला प्रतिमाह किराया था नहीं निकल पा रहा है। यही हाल रहा तो अगले महीने कैंटीन बंद करनी पड़ जाएगी।

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चाय कोल्ड ड्रिंक तक नहीं बिक रही अब तो: इसरार

स्टॉल संचालक इसरार ने बताया कि जुलाई से पहले तक प्रतिदिन ठीक-ठाक कमाई हो जाया करती थी लेकिन अब तो यात्री ही नहीं आ रहे। ट्रेनें खाली जा रही हैं। ऐसे में कमाई नहीं होगी स्टॉल का किराया तक नहीं निकल पा रहा है।

माह- साधारण यात्री

अप्रैल -1,78,550

मई – 2,16,733

जून- 1,98,448

15जुलाई तक- 60 हजार के आसपास

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पूर्णागिरी मेला बंद होने के बाद यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है। कुछ बरसात का भी असर है। मेले के दौरान खूब यात्री रहते हैं। – धर्मेंद्र कुमार, स्टेशन अधीक्षक


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