Pilibhit News: भूलेख पोर्टल से नदारद हैं खतौनियां, किसान परेशान
बीसलपुर में एक दशक से बनी हुई है समस्या, जानते हुए भी जिम्मेदार नहीं उठा रहे कदम
बीसलपुर। विभागीय हीलाहवाली से भूलेख पोर्टल पर नगर क्षेत्र के किसानों की खतौनियां कई वर्षों से अपडेट नहीं हैं। इस वजह से किसानों को काफी दिक्कत हो रही है।
शासन के निर्देश पर जिले की अन्य तहसीलों के तरह इस तहसील में भी वर्ष 2005 से भूलेख पोर्टल पर खतौनियों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। ग्रामीण क्षेत्र के अलावा नगर क्षेत्र के किसानों की खतौनियां भूलेख पोर्टल पर अपडेट की गईं थी। कुछ दिनों तक तो सब कुछ सही चलता रहा। लगभग एक दशक पूर्व भूलेख पोर्टल से नगर क्षेत्र के किसानों की खतौनियां एकाएक गायब हो गईं।
आरोप है कि भूलेख पोर्टल से नगर क्षेत्र की खतौनियां जानबूझकर हटाईं गईं। राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी से पोर्टल से नगर क्षेत्र की खतौनियां हटीं। नियमानुसार राजस्व अधिकारियों को उसी समय विशेष रुचि लेकर भूलेख पोर्टल पर नगर क्षेत्र की खतौनियां अपडेट करानी चाहिए थीं, पर ऐसा हो नहीं पाया। इसके बाद भी राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गंभीर समस्या का समाधान कराने की जहमत नहीं उठाई।
– खतौनियों के बारे में जानें खतौनियों में किसान का नाम, पता, उसकी जमीन का पूरा ब्योरा, दर्ज होता है। खतौनियां किसानों के लिए बड़ी काम की चीज होती है। सभी किसान खतौनियों के महत्व से बखूबी वाकिफ भी हैं। (संवाद)
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किसानों को हो रहे नुकसान खतौनियां न मिलने से किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओ का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नए किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए तभी आवेदन कर पाएंगे, जब आवेदन पत्रों के साथ खतौनी संलग्न होगी। खतौनी न होने से बेची जाने वाली जमीन का बैनामा मुश्किल से हो पा रहा है। बैनामे के बाद संबधित जमीन का अमल दरामद भी नहीं हो पा रहा। साथ ही किसानों को अपने जमीन संबंधी स्वामित्व का पता भी नहीं लग पा रहा तो मृत किसानों के वारिसों की विरासत दर्ज नहीं हो पा रही है।
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नगर क्षेत्र के किसानों की खतौनियां भूलेख पोर्टल पर दर्ज न होने की समस्या काफी पुरानी है। इस संबंध में विभागीय उच्चाधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इस समस्या का समाधान राजस्व परिषद लखनऊ से होना है।
-संदीप यादव, उपजिलाधिकारी बीसलपुर।