पीलीभीत

Pilibhit News: मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट्स और प्लाज्मा चढ़ाने की व्यवस्था नहीं

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There is no arrangement for transfusion of platelets and plasma in the medical college.

मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज । संवाद

पीलीभीत। डेंगू पीड़ित गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए उन्हें प्लेटलेट्स और प्लाज्मा चढ़ाया जाता है। इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट्स और प्लाज्मा चढ़ाने तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में आने वाले गंभीर मरीजों को रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि अधिकांश डेंगू के मरीजों यहीं उपचार से ठीक कर लिया जाता है।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक- जिले में अब तक 118 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें अधिकांश लोग ठीक हो चुके हैं। मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज में महज सात डेंगू के मरीज ही भर्ती हैं, जबकि निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की भरमार है। बता दें कि जिले में बुखार से कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा पूरनपुर का हाल खराब है।

पूरनपुर क्षेत्र में अब तक छह लोगों ने बुखार से जान गवाई हैं तो वहीं बीसलपुर में दो, बिसलंडा में दो, अमरिया में दो और कलीनगर में दो लोगों की मौत बुखार से हुई हैं। जिले में लगातार बुखार से मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। तराई का पूरा जिला बुखार से परेशान है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 1500 के आसपास मरीज पहुंचते हैं, जिसमें 80 फीसदी मरीज बुखार के होते हैं।

डेंगू वार्ड में भर्ती किए जाते हैं पीड़ित मरीज

मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके सागर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा और प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अब तक डेंगू के आठ गंभीर मरीजों को बरेली रेफर किया गया हैं। अधिकांश मरीजों को मेडिकल कॉलेज में दिए जाने वाले उपचार से ठीक कर लिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में अलग से डेंगू वार्ड है, जहां डेंगू से पीड़ित मरीजों को भर्ती किया जाता हैं और उनको नियमित दवाएं दी जाती हैं।

देशी उपचार भी आ रहा काम

मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि गांव क्षेत्रों में डेंगू बहुत तेजी से फैल रहा है। सरकारी अस्पतालों में इलाज तो भगवान भरोसे है। प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना सबके बस की बात नहीं है। अगर गांव क्षेत्र में देशी इलाज न हो तो न जाने कितने लोग डेंगू की भेंट चढ़ गए होते। गांव के काफी लोग बकरी का दूध, पपीता, कीवी आदि खाने से ठीक हो जाते हैं।

छिड़काव के नाम पर हो रही रस्म अदायगी

स्वास्थ्य विभाग के अलावा नगर पालिका की ओर से लगातार छिड़काव किए जाने का दावा किया जा रहा है। बावजूद इसके बुखार पर लगाम नहीं लग पा रही है। शहर में दिन ब दिन मच्छरों की संख्या बढ़ती जा रही है। पालिका व स्वास्थ्य विभाग का मलेरिया विभाग का छिड़काव महज कुछ ही जगहों पर हो रहा है। यही कारण है कि डेंगू का मच्छर नहीं मर पा रहा है। घनी आबादी में धीरे-धीरे हालात बिगड़ रहे हैं। वहां छिड़काव करने वाली गाड़ियां नहीं पहुंच रही हैं। जिससे डेंगू सहित अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। प्रभारी ईओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि शहर में नियमित साफ-सफाई के साथ ही छिड़काव किया जा रहा है।

मेडिकल कॉलेज में फिलहाल प्लाज्मा और प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं हैं। अगर कोई डेंगू का गंभीर मरीज आता हैं तो बरेली रेफर करते हैं, ताकि मरीज की जान बचाई जा सके। अधिकांश मरीजों को तो मेडिकल कॉलेज में ही उपचार से ठीक कर लिया जाता है।

-डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य मेडिकल कॉलेज


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