Pilibhit News: बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के 20 घंटे बाद भी नहीं पहुंचे अफसर
कलीनगर। बासखेड़ा गांव में शनिवार रात से डेरा जमाए बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के 20 घंटे बाद भी वन विभाग का कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा। सिर्फ वन दरोगा के नेतृत्व में टीम बाघ की निगरानी में जुटी है। सोमवार रात तीन बजे सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार पहुंचे, लेकिन 20 मिनट रुककर लौट गए। ग्रामीण विभागीय अफसरों को फोन करते रहे, लेकिन अफसर एक-दूसरे पर टालते रहे। ग्रामीणों ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
माधोटांडा के गांव बासखेड़ा में शनिवार रात बाघ आबादी के निकट आम के बाग में पहुंच गया। मवेशी का मांस खाने के लिए के बाद बाघ ने बाग में ही डेरा जमा लिया। रविवार को वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए चारों ओर जाल लगाकर घेराबंदी की। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में 12 बजे बाघ को पकड़ने का ऑपरेशन शुरू किया गया। पांच घंटे बाद डॉ. दक्ष गंगवार ने बाघ को ट्रैकुलाइज करने के लिए डॉट मारी, लेकिन बाघ बेहोश नहीं हुआ। बाघ को उठाने पहुंची टीम को जान बचाने के लिए दौड़ लगानी पड़ी। अफसरों में काफी देर असमंजस की स्थिति रही।
रविवार शाम करीब छह बजे अफसर चले गए। कहा गया कि सोमवार सुबह रेस्क्यू शुरू किया जाएगा। रात में कुछ वनकर्मी निगरानी में जुटे रहे, लेकिन सोमवार रेस्क्यू की बात तो दूर दोपहर दो बजे तक कोई अफसर बाघ की सुध लेने नहीं पहुंचा। इस दौरान बाघ कई बार बाघ के एक छोर पर पड़े मृत मवेशी का मांस खाने के लिए वहां पहुंचा। इससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई। आक्रोश के बाद ढाई बजे सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार मौके पर आए, लेकिन 10 मिनट में ही लौट गए। उनके जाते ही बाघ फिर पशु के शव के पास पहुंच गया।
दिनभर ग्रामीण बाग के आसपास मौजूद रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने रेस्क्यू पूरा करने की बात कही थी, लेकिन बाघ की मौजूदगी के बाद भी अफसर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मौके पर पहुंचे विधायक बाबूराम पासवान को भी समस्या बताई। विधायक ने अफसरों से बातचीत कर समस्या का निस्तारण कराने का आश्वासन दिया।
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कुत्ते पर दौड़ा बाघ, दूर खड़े देखते रहे ग्रामीण
सोमवार को बाघ मृत मवेशी के शव के पास कई बार पहुंचा। इस दौरान वहां मौजूद कुत्ते पर बाघ दौड़ पड़ा। दूर खड़े होकर ग्रामीण इस नजारे को देखते रहे। ग्रामीणों ने वीडियो भी बनाया। इसके बाद बाघ झाड़ियों में जाकर बैठ गया। देर रात तक ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही।
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ग्रामीण बोले, आधा-अधूरा छोड़ दिया रेस्क्यू, सिर पर मंडरा रही आफत
बाघ के रेस्क्यू को अधिकारी आधा-अधूरा छोड़ गए हैं। सोमवार को बाघ लगातार चहलकदमी करता रहा। अफसर सुनने के बजाए एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। खतरा सिर पर मंडरा रहा है। – गुरदीप सिंह गोगी
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बाघ को पकड़ने के लिए अभियान के नाम पर खानापूर्ति की गई। बाघ लगातार मवेशी का मांस खाने पहुंच रहा है। अगर बाघ को नहीं पकड़ा गया तो खतरा और बढ़ जाएगा। – जमुना प्रसाद
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बाघ की सुरक्षा को लेकर दिखी लापरवाही
ट्रैंकुलाइज करने के बाद बाघ को न पकड़ पाने से अफसर परेशान दिखे। डॉट लगने के बाद भी बाघ बेहोश क्यों नहीं हुआ, इसकी भी चर्चा रही। बाग में बाघ डेरा जमाए रहा। सोमवार को बाघ की सुरक्षा के लिए चंद वनकर्मी लगाए गए। वे भी बाग से दूरी बनाए रहे। बाघ दिखने के बाद बाग में भीड़ बढ़ने लगी है। बाघ के काफी करीब तक भीड़ जाती रही। मार्ग पर लोग पैदल आवागमन करते रहे। जमुनिया चौकी के दरोगा एक सिपाही के साथ मौजूद रहे। ऐसे में बाघ की सुरक्षा को लेकर लापरवाही साफ दिखी।
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वर्जन
सामाजिक वानिकी के स्तर से रेस्क्यू किया जा रहा है। टीम निगरानी में जुटी है। – नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर
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पिंजरा लगाने पहुंचे वनकर्मियों पर बाघ ने किया हमला
देर शाम वनकर्मी पिंजरा लगाने के लिए जाल हटाकर कुछ अंदर की ओर पहुंचे। इस दौरान झाड़ियों से निकलकर बाघ वनकर्मी धर्मेंद्र, सुमन, राम भजन और कंधई पर हमलावर हो गया। जान बचाने के लिए वनकर्मी वहां से भाग खड़े हुए। बाग में मौजूद भीड़ के बीच भी भगदड़ मच गई।